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RBI: आरबीआई के नए गवर्नर जरूरी निर्णयों में अधिक सलाह लेने का दृष्टिकोण अपना रहे, नुवामा रिसर्च ने किया दावा

Thu, 27 Feb 2025 12:38 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Nuvama Report on RBI Governor: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अपने नए गवर्नर के तहत अधिक सलाह लेने का दृष्टिकोण अपनाया है। नुवामा रिसर्च ने अपनी एक रिपोर्ट में यह बात कही है। रिपोर्ट में केंद्रीय बैंक के गवर्नर के बारे में आगे क्या कहा गया है, आइए जानते हैं।
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संजय मल्होत्रा - फोटो : ANI
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विस्तार
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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अपने नए गवर्नर के तहत अधिक सलाह लेने का दृष्टिकोण अपनाया है। नुवामा रिसर्च ने अपनी एक रिपोर्ट में यह बात कही है। नुवामा के अनुसार, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) और माइक्रोफाइनेंस संस्थानों (एमएफआई) के लिए ऋण पर जोखिम भार में वृद्धि को वापस लेने के अपने हाल के फैसले से यह जाहिर होता है। 

नुवामा ने अपने निष्कर्ष के पक्ष में दिया यह तर्क

रिपोर्ट में बताया गया है कि, मौद्रिक नीति की घोषणा के बाद 7 फरवरी को मीडिया से बातचीत में, आरबीआई गवर्नर और डिप्टी गवर्नर ने कहा था कि केंद्रीय बैंक परस्पर जुड़े जोखिमों के कारण एनबीएफसी ऋणों पर जोखिम भार को कम करने की संभावना नहीं है। हालांकि, इस रुख के बावजूद, आरबीआई ने बाद में एनबीएफसी के लिए बैंक ऋण पर जोखिम भार को कम कर दिया। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह निर्णय आरबीआई गवर्नर और बैंकों व एनबीएफसी के शीर्ष अधिकारियों के बीच हाल की बैठकों से प्रभावित लगता है। 

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नुवामा रिसर्च ने कहा, "नए गवर्नर के अधीन आरबीआई पहले की तुलना में अधिक परामर्शी दृष्टिकोण अपना रहा है.....आरबीआई ने बैंकों के एनबीएफसी ऋणों पर जोखिम भार में ढील दी है। यह फैसला संभवतः गवर्नर की हाल ही में एनबीएफसी और बैंकों के सीईओ से मुलाकात के बाद हुआ है। एनबीएफसी ने इस छूट की मांग की होगी"।

एफएफआई पर जोखिम भार में कमी उन बैंकों के लिए फायदेमंद होगी, जिन्होंने माइक्रोफाइनेंस ऋणों के रूप में महत्वपूर्ण जोखिम उठा रखा है। हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि लघु वित्त बैंकों (SFB) पर प्रभाव सीमित होगा क्योंकि अधिकांश एफएफबी ने इन ऋणों पर जोखिम भार को 125 प्रतिशत तक नहीं बढ़ाया है।

एनबीएफसी पर नुवामा ने रिपोर्ट में कही यह बात

नुवामा के अनुसार आरबीआई की ओर से एनबीएफसी के लिए जोखिम भार में छूट दिए जाने से उनके फंड की लागत (CoF) कम होने की उम्मीद है, खासकर उन लोगों के लिए जो बैंक उधार पर बहुत अधिक निर्भर हैं। यह कदम एनबीएफसी को बहुत जरूरी राहत प्रदान कर सकता है, जो पहले नियमों के सख्त होने के कारण बढ़ी हुई फंडिंग लागत से जूझ रहे हैं। 

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हालांकि, नुवामा की रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि इस छूट के बावजूद, बैंक एनबीएफसी ऋण देने में आक्रामक रूप से वृद्धि नहीं कर सकते हैं,  ऐसा इस क्षेत्र में बढ़ते जोखिमों को देखते हुए किया जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार एमएफआई ऋणों पर छूट बैंकों के पूंजी पर्याप्तता अनुपात (सीएआर) के लिए सकारात्मक है। ऐसे में, एनबीएफसी ऋणों के लिए छूट केवल एनबीएफसी के लिए फायदेमंद है, बैंकों के लिए नहीं।

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