भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंकों के लिए नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) के दैनिक रखरखाव नियमों को सख्त कर दिया है। शुक्रवार को हुई घोषणा के अनुसार, अब बैंकों को निर्धारित सीआरआर का 99 फीसदी दैनिक रूप से बनाए रखना होगा। यह सीमा पहले 90 फीसदी थी। संशोधित नियम 16 अक्तूबर से शुरू होने वाले रिपोर्टिंग पखवाड़े से लागू होंगे।
मौजूदा व्यवस्था में बैंकों को एक पखवाड़े के दौरान निर्धारित सीआरआर के बराबर औसत शेष रखना होता है। उन्हें किसी भी दिन इस आवश्यकता का कम से कम 90 फीसदी बनाए रखने की छूट थी। नए नियम के तहत, यह दैनिक सीमा बढ़ाकर 99 फीसदी कर दी गई है। इससे बैंकों को हर दिन लगभग पूरा सीआरआर बनाए रखना होगा। यह केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति को अधिक प्रभावी बनाएगा।
अगस्त और सितंबर के दौरान मजबूत पूंजी प्रवाह के कारण बैंकिंग प्रणाली में नकदी बढ़ी थी। इसमें आरबीआई की विशेष विदेशी मुद्रा अनिवासी बैंक (एफसीएनआर-बी) जमा सुविधा से जुटाई गई रकम भी शामिल थी। हालांकि, हाल के सप्ताहों में अतिरिक्त नकदी में कमी आई है। यह कमी परिवर्तनीय दर रिवर्स रेपो (वीआरआरआर) नीलामी और खुले बाजार परिचालन (ओएमओ) के तहत बॉन्ड बिक्री के कारण हुई। अगस्त में औसत दैनिक अतिरिक्त नकदी 5.9 लाख करोड़ रुपये थी। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, यह 3.92 लाख करोड़ रुपये हो गई है।
केंद्रीय बैंक नकदी की स्थिति पर लगातार करीबी नजर रखेगा। वह जरूरत के अनुसार उपयुक्त साधनों का उपयोग करता रहेगा। इनमें वित्तीय प्रणाली में नकदी को व्यवस्थित बनाए रखने के लिए वीआरआरआर नीलामी शामिल है। डॉलर-रुपये सेल-बाय स्वैप और ओएमओ परिचालन भी इन साधनों का हिस्सा हैं। यह सुनिश्चित करेगा कि बाजार में पर्याप्त तरलता बनी रहे।