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आरबीआई का सर्वे: परिवारों को महंगाई और घटने की उम्मीद, कम ब्याज दर से उपभोक्ता भरोसे में सुधार

Fri, 08 Aug 2025 03:08 AM IST
शिव शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी

सार

भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई के बृहस्पतिवार को जारी सर्वेक्षण के मुताबिक, शहरी उपभोक्ताओं के विश्वास में भी बढ़ोतरी आई है। 1 से 12 जुलाई के बीच 19 प्रमुख शहरों में किए गए इस सर्वेक्षण में 5,197 लोगों को शामिल किया गया।
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खुदरा महंगाई - फोटो : Agency
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विस्तार
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लगातार कम होती लगातार महंगाई में और गिरावट आने की उम्मीद है। भारत के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जुलाई में उपभोक्ता विश्वास में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है। यह अर्थव्यवस्था को लेकर बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। इस सकारात्मक बदलाव के पीछे मुख्य रूप से खुदरा महंगाई में गिरावट और अधिक अनुकूल ब्याज दरें हैं, जिनके चलते घर-परिवारों की धारणा बेहतर हुई है।

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भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई के बृहस्पतिवार को जारी सर्वेक्षण के मुताबिक, शहरी उपभोक्ताओं के विश्वास में भी बढ़ोतरी आई है। 1 से 12 जुलाई के बीच 19 प्रमुख शहरों में किए गए इस सर्वेक्षण में 5,197 लोगों को शामिल किया गया। वर्तमान मुद्रास्फीति की औसत धारणा मई, 2025 के 7.7 प्रतिशत से 0.50 फीसदी घटकर जुलाई में 7.2 प्रतिशत रह गई। सर्वेक्षण के मुताबिक, अगले तीन महीनों और एक साल के लिए मुद्रास्फीति की उम्मीदें क्रमशः 0.60 और 0.50 फीसदी घटकर 8.3 प्रतिशत और 9.0 प्रतिशत रह गईं। तीन महीने की अवधि के लिए, 79.5 प्रतिशत परिवारों को कीमतों में वृद्धि की उम्मीद है। यह मई में 80.5 प्रतिशत से कम है। एक साल की अवधि के लिए यह संख्या 88.1 प्रतिशत रही, जबकि मई, 2025 में यह 89.2 प्रतिशत थी।

हालांकि, नए सर्वेक्षण में खाद्य कीमतों में वृद्धि की उम्मीद रखने वालों का प्रतिशत मई के 82.8 फीसदी से घटकर 80 फीसदी रह गया। शहरवार भिन्नताएं स्पष्ट थीं। उदाहरण के लिए, भोपाल में एक वर्ष आगे की महंगाई की सबसे अधिक 11.2 प्रतिशत की उम्मीद दर्ज की गई। अहमदाबाद के परिवारों में सबसे कम 5.4 प्रतिशत की उम्मीद थी। दिल्ली के लोगों ने वर्तमान मुद्रास्फीति 8.1 फीसदी आंकी। अनुमान लगाया कि एक वर्ष बाद यह 9.0 प्रतिशत तक बढ़ जाएगी।
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सेवानिवृत्त लोगों को ज्यादा महंगाई बढ़ने की उम्मीद
सेवानिवृत्त व्यक्तियों और वृद्ध लोगों की मुद्रास्फीति संबंधी धारणा और अपेक्षाएं सबसे अधिक रहीं। 60 वर्ष से ऊपर के लोगों ने अनुमान लगाया कि मुद्रास्फीति एक वर्ष में बढ़कर 9.6 प्रतिशत हो जाएगी। दिहाड़ी मजदूरों ने सबसे कम 8.1 फीसदी की औसत अपेक्षा व्यक्त की। हालांंकि, आरबीआई इन विचारों का समर्थन नहीं करता है। यह उत्तरदाताओं के मुद्रास्फीति दबावों पर जानकारी देने का बस एक सर्वे है। इसलिए, सर्वेक्षण के परिणाम उत्तरदाताओं के विचारों को दर्शाते हैं।
 
सीएसआई में आई तेजी
इस द्विमासिक सर्वेक्षण के अनुसार, वर्तमान स्थिति सूचकांक (सीएसआई) मई के 95.4 से बढ़कर जुलाई में 96.5 हो गया। रोजगार और मूल्य को लेकर बनी चिंताओं के बावजूद, आय, खर्च और सामान्य आर्थिक स्थितियों के बारे में उपभोक्ताओं की बेहतर धारणाओं के कारण यह सुधार हुआ।भविष्य प्रत्याशा सूचकांक (एफईआई) भी पिछले दौर के 123.4 से 1.3 अंक बढ़कर 124.7 हो गया। यह आर्थिक दृष्टिकोण, आय वृद्धि और भविष्य के खर्च के बारे में आशावाद को दर्शाता है। मौजूदा मूल्य स्थिति और मुद्रास्फीति को लेकर निराशावाद लगातार तीसरे सर्वेक्षण दौर में कम हुआ है।
 
रोजगार की धारणा में आई गिरावट
रोजगार के मोर्चे पर मौजूदा धारणा में गिरावट आई। यह मई के -5.9 से जुलाई में घटकर -6.7 रह गई। हालांकि, अगले एक साल में रोजगार की उम्मीदों में शुद्ध प्रतिक्रिया पहले के 29.8 से बढ़कर 31.0 हो गई। वर्तमान खर्च के लिए शुद्ध प्रतिक्रिया बढ़कर 78.0 हो गई, जबकि भविष्य के खर्च के लिए उम्मीदें बढ़कर 80.0 हो गईं। इसे गैर जरूरी खर्च में बढ़ोतरी से भी मदद मिली। जरूरी खर्च लगातार ऊंचा बना रहा। वर्तमान धारणा के लिए शुद्ध प्रतिक्रिया 86.5 और भविष्य की उम्मीदों के लिए 86.2 रही।
 
कर्ज मांग में बढ़ोतरी की उम्मीद
वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में प्रमुख क्षेत्रों में ऋण मांग में मौसमी नरमी देखी गई। हालांकि, बैंकरों को आगामी तिमाहियों में सुधार की उम्मीद है। सर्वे में 30 प्रमुख अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों को शामिल किया गया। इनकी देश के कुल बैंक ऋण में 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी है।
 
वस्तु आयात निर्यात की तुलना में दोगुना बढ़ेगा
चालू वित्त वर्ष में भारत का वस्तु आयात निर्यात की तुलना में दोगुना बढ़ेगा। 2025-26 में व्यापारिक आयात में 2.5 फीसदी वृद्धि होने की संभावना है, जो व्यापारिक निर्यात की वृद्धि दर के दोगुने से भी अधिक है। 2025-26 के दौरान व्यापारिक निर्यात और आयात में क्रमशः 1.2 और 2.5 फीसदी की वृद्धि होने का अनुमान है। 2026-27 में डॉलर के संदर्भ में निर्यात में 4.9 और आयात में 6.0 फीसदी की वृद्धि होने का अनुमान है। इससे 2025-26 में चालू खाता घाटा वर्तमान बाजार मूल्यों पर सकल घरेलू उत्पाद का 0.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है। वर्ष 2026-27 में थोड़ा बढ़कर 0.9 प्रतिशत होने का अनुमान है। वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 2025-26 में 6.4 प्रतिशत और 2026-27 में 6.7 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है। यह आरबीआई के 6.5 प्रतिशत के अनुमान से कम है।
 
बढ़ती इनपुट लागत और वेतन का रहेगा दबाव
कंपनियों ने बढ़ती इनपुट लागत और वेतन दबाव को लेकर चिंताएं व्यक्त कीं। 693 कंपनियों ने बताया चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में दोनों क्षेत्रों में व्यावसायिक स्थिति, कारोबार और रोजगार में सुधार हुआ है। जुलाई-सितंबर तिमाही के लिए उम्मीदों और प्रमुख मापदंडों पर शेष वित्तीय वर्षों के लिए संभावनाओं को भी शामिल किया गया। सेवा क्षेत्र की फर्मों ने पहली तिमाही में समग्र व्यावसायिक स्थिति, रोजगार की स्थिति और कारोबार में सुधार दर्ज किया। हालांकि, बढ़ती मजदूरी एक बढ़ती चिंता का विषय बनकर उभरी।

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