आरबीआई ने मंगलवार को जारी अप्रैल के बुलेटिन में कहा, सूझबूझ के साथ नीतिगत समर्थन भारत को वैश्विक अस्थिरता को अवसर में बदलने और उभरते परिदृश्य में अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद कर सकता है। हालांकि, व्यापार तनाव और वित्तीय बाजार में अस्थिरता ने निकट भविष्य में वैश्विक वृद्धि के कमजोर होने के बारे में चिंताएं बढ़ा दी हैं।
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच उपभोग और निवेश जैसे वृद्धि के घरेलू इंजन मजबूत बने हुए हैं। ये बाहरी प्रतिकूल परिस्थितियों से अपेक्षाकृत कम प्रभावित हैं। हालांकि, वैश्विक आर्थिक परिदृश्य के कमजोर होने के साथ विदेश से मांग में नरमी के कारण भारत की आर्थिक वृद्धि दर प्रभावित हो सकती है।
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आरबीआई ने मंगलवार को जारी अप्रैल के बुलेटिन में कहा, सूझबूझ के साथ नीतिगत समर्थन भारत को वैश्विक अस्थिरता को अवसर में बदलने और उभरते परिदृश्य में अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद कर सकता है। हालांकि, व्यापार तनाव और वित्तीय बाजार में अस्थिरता ने निकट भविष्य में वैश्विक वृद्धि के कमजोर होने के बारे में चिंताएं बढ़ा दी हैं।
कृषि आय में हो सकती है वृद्धि
बुलेटिन में आगे कहा गया है कि इस साल मानसून के सामान्य से बेहतर रहने का अनुमान से कृषि क्षेत्र की संभावनाओं को बढ़ावा मिला है। इससे कृषि आय में वृद्धि हो सकती है और खाद्य कीमतों को काबू में रखने में मदद मिल सकती है। बुलेटिन के मुताबिक, भारत के विभिन्न देशों के साथ व्यापार संबंधों को देखते हुए यह आपूर्ति शृंखला को व्यवस्थित कर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के स्रोतों को विविध बनाकर और वैश्विक निवेशकों के साथ जुड़ाव से लाभान्वित होने को तैयार है।