रिजर्व बैंक ने अनुमान जताया है कि मार्च में समाप्त होने वाली आखिरी तिमाही तक खुदरा महंगाई की दर 6.5 फीसदी तक पहुंच जाएगी। सब्जियों के अलावा दूध, दाल जैसे खाद्य पदार्थों और क्रूड की कीमतों मेें उछाल के कारण भी महंगाई का दबाव बढ़ सकता है।
यही वजह रही कि रिजर्व बैंक ने लगातार दूसरी एमपीसी बैठक में रेपो रेट को 5.15 फीसदी पर स्थिर रखा। साथ ही रिवर्स रेपो रेट में भी कोई बदलाव नहीं किया, जो 4.9 फीसदी पर बनी हुई है। हालांकि, अगले वित्त वर्ष की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) में महंगाई 5.4-5 फीसदी और तीसरी तिमाही (अक्तूबर-दिसंबर) में खुदरा महंगाई 3.2 फीसदी पर आने का अनुमान जताया है।
1 लाख करोड़ के रेपोस से घटेगी कर्ज की ब्याज दर
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने एमपीसी बैठक में पुनर्खरीद समझौतों (रेपोस) पर लिए गए फैसलों की बाबत कहा कि इस कदम से अर्थव्यवस्था को काफी मदद मिलेगी। आरबीआई ने 1 साल और तीन साल की अवधि वाले रेपोस जारी करने का फैसला किया है, जिसकी कुल सीमा 1 लाख करोड़ रुपये होगी। इसकी शुरुआत 15 फरवरी से शुरू हो रहे पखवाड़े के साथ होगी।
दास ने कहा कि फैसले से बैंकों को अपनी उधारी दरें घटाने में मदद मिलेगी। रेपोस को सरकारी प्रतिभूतियों से लघु अवधि का उधार भी कहते हैं। इसमें विक्रेता इन प्रतिभूतियों को कुछ दिन के लिए निवेशकों को बेचता है और फिर थोड़ी बढ़ी हुई ब्याज दर पर खरीद लेता है।
गवर्नर ने कहा कि बढ़ते राजकोषीय घाटे को पूरा करने के लिए अतिरिक्त नोट छापने की कोई योजना नहीं है। सरकार ने बजट में राजकोषीय जवाबदेही और बजट प्रबंधन (एफआरएमबी) कानून के तहत छूट उपबंध का उपयोग किया है।
इसके तहत घाटे की रूपरेखा निर्धारित करने के लिए 0.5 फीसदी तक वृद्धि की गुंजाइश रखी है। यानी हालात को देखते हुए सरकार अपने अनुमानित राजकोषीय घाटे को आधा फीसदी तक बढ़ा सकती है। सरकार ने अगले वित्त वर्ष 2020-21 के लिए राजकोषीय घाटा 3.5 फीसदी जबकि चालू वित्त वर्ष के लिए 3.8 फीसदी रहने का अनुमान जताया है।