फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Forex Reserve: विदेशी मुद्रा भंडार में उछाल, जानिए कितने अरब डॉलर हुआ और कितने महीनों के लिए है पर्याप्त

Sun, 18 Jan 2026 12:31 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

देश के विदेशी मुद्रा भंडार में तेजी आई है और इसमें करीब 39 करोड़ डॉलर की बढ़ोतरी हुई है। इस बढ़ोतरी के बाद देश का विदेशी मुद्रा भंडार सर्वकालिक उच्च स्तर के करीब पहुंच गया है। आइए जानते हैं कि क्या कहते हैं रिजर्व बैंक के आंकड़े
विज्ञापन
भारतीय रिजर्व बैंक - फोटो : एएनआई (फाइल)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारतीय रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में उछाल आया है। 9 जनवरी को खत्म हुए सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 39 करोड़ डॉलर बढ़कर करीब 687 अरब डॉलर हो गया है। सोने के भंडार में उछाल और विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में गिरावट देखी गई है। इससे पहले के हफ्ते में विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट देखी जा रही थी।
विज्ञापन


सर्वकालिक उच्च स्तर के करीब पहुंचा विदेशी मुद्रा भंडार
  • ताजा बढ़ोतरी के बाद देश का विदेशी मुद्रा भंडार सितंबर 2024 के सर्वकालिक उच्च स्तर 704 अरब डॉलर के करीब पहुंच गया है।
  • विदेशी मुद्रा भंडार में सबसे बड़ा घटक विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां (एफसीए) हैं, जो 550 अरब डॉलर हैं। हालांकि इसमें 1.12 अरब डॉलर की गिरावट आई है।
  • रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों के अनुसार, सोने का भंडार वर्तमान में 112.83 अरब  है, जो पिछले सप्ताह की तुलना में 1.5 अरब डॉलर ज्यादा है। 
11 महीने तक आयात के लिए पर्याप्त 
  • दिसंबर में मौद्रिक नीति की समीक्षा बैठक के बाद रिजर्व बैंक ने कहा था कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार 11 महीने तक विदेश से आयात के लिए पर्याप्त है।
  • रिजर्व बैंक ने विदेशी मुद्रा भंडार को लेकर संतोष जाहिर किया था और कहा कि भारत का बाहरी क्षेत्र लचीला बना हुआ है। 
  • आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में देश का विदेशी मुद्रा भंडार करीब 56 अरब डॉलर बढ़ा। वहीं 2024 में ये वृद्धि 20 अरब डॉलर से थोड़ी अधिक रही।
  • 2023 में विदेशी मुद्रा भंडार में करीब 58 अरब डॉलर की तेजी आई थी। हालांकि 2022 में इसमें 71 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई थी। 
  • विदेशी मुद्रा भंडार, किसी देश के केंद्रीय बैंक या मौद्रिक प्राधिकरण की परिसंपत्तियां होती हैं, जो मुख्य तौर पर अमेरिकी डॉलर है। इसमें कुछ हिस्सा यूरो, जापानी येन और पाउंड स्टर्लिंग का भी होता है। आरबीआई रणनीतिक रूप से रुपये के मजबूत होने पर डॉलर खरीदता है और रुपये के कमजोर होने पर डॉलर बेचता है। 
ये भी पढ़ें- EU-Mercosur FTA: यूरोपीय संघ और मर्कोसुर के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर, जानिए वैश्विक असर
विज्ञापन



 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें