सोने की कीमतों में पिछले साल से जारी बेतहाशा तेजी ने भारतीय परिवारों की दौलत में जबरदस्त इजाफा किया है। इस वजह से पिछले साल के दौरान भारतीय परिवारों की संपत्ति में 117 लाख करोड़ रुपये (1.3 लाख करोड़ डॉलर) की वृद्धि हुई है। इससे परिवारों के लिए एक मजबूत खर्च करने की क्षमता बनी है। एचडीएफसी म्यूचुअल फंड की जारी रिपोर्ट सोने की अटूट चमक को रेखांकित करती है।
रिपोर्ट के अनुसार, देशभर के करोड़ों परिवारों के गहने, सिक्के और बार इस उछाल के प्रमुख लाभार्थी बने हैं। वैश्विक अस्थिरता, मुद्रा उतार-चढ़ाव और देशों के बीच तनावों ने निवेशकों को सोने की ओर आकर्षित किया, जिसका फायदा भारत को मिला। यह वृद्धि इतनी विशाल है कि यह कई देशों के जीडीपी से भी अधिक है। ग्रामीण इलाकों से लेकर महानगरों तक हर वर्ग के परिवारों की बचत का मूल्य अचानक बढ़ गया। खासकर महिलाएं, जो परिवार का अधिकांश सोना संभालती हैं, इस लाभ से मजबूत हुई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कागजी मुनाफा है, जो बाजार सुधार पर निर्भर करता है। फिर भी, यह संपत्ति उपभोग बढ़ाने, ऋण चुकाने या नए निवेश में सहायक सिद्ध हो सकती है। आर्थिक मोर्चे पर यह वृद्धि बैंकिंग क्षेत्र को गति देगी और नीति-निर्माताओं के लिए नई चुनौतियां पैदा करेगी। आरबीआई इस पर नजर रखे हुए है। कुल मिलाकर सोना भारतीय परिवारों का विश्वसनीय साथी साबित हुआ है।
25 वर्षों में यह सबसे बड़ा लाभ
रिपोर्ट के अनुसार, यह पिछले 25 वर्षों में सोने की कीमतों में वृद्धि से होने वाला सबसे बड़ा संपत्ति लाभ है। कैलेंडर वर्ष 2025 के दौरान सोने की कीमत में 58,310 रुपये प्रति 10 ग्राम या 73 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस तेज वृद्धि से सोने के एवज में लिए जाने वाले खुदरा कर्ज में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। भारतीय शेयर बाजारों के लिए 2025 एक समेकन का वर्ष साबित हुआ। लेकिन सोने जैसे वैकल्पिक संपत्तियों ने असाधारण ताकत दिखाई।
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शेयर बाजारों ने निराश किया
2025 के दौरान वैश्विक बाजारों में भी भारत का प्रदर्शन खराब रहा। लेकिन सोने जैसे वैकल्पिक संपत्तियों ने असाधारण ताकत दिखाई। पिछले वर्ष सोना स्पष्ट रूप से एक सुरक्षित संपत्ति के रूप में उभरा। एनएसई निफ्टी ने वैश्विक समकक्षों और उभरते बाजारों की तुलना में लगभग 25 प्रतिशत कम प्रदर्शन किया, जो लगभग तीन दशकों में इसका सबसे खराब प्रदर्शन है।
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