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RBI Repo Rate: आरबीआई की एमपीसी रेपो रेट में कटौती करती है तो आपके लोन की ईएमआई पर क्या होगा असर? जानिए गणित

Thu, 06 Feb 2025 04:51 PM IST
नविता स्वरूप बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

RBI MPC Repo Rate: मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के बाद 7 फरवरी 2025 को भारतीय रिजर्व बैंक के नए गवर्नर संजय मल्होत्रा मॉनिटरी पॉलिसी की घोषणा करेंगे। बाजार के विशेषज्ञों को उम्मीद है कि इस बार रेपो रेट में 25 आधार अंकों या 0.25% की कटौती कर इसे 6.25 प्रतिशत किया जा सकता है। एक लंबे समय के बाद यदि ब्याज दरों में कटौती होती है, तो इससे आम आदमी को होम लोन, वाहन, पसर्नल लोन की ईएमआई में राहत मिल सकती है। कितनी राहत मिल सकती है, आइए जानें गणित।
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रेपो रेट - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) 7 फरवरी 2025 की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के बाद रिजर्व बैंक के नए गवरर्न संजय मल्होत्रा मॉनेटरी पॉलिसी की घोषणा करेंगे। बाजार के विशेषज्ञों को उम्मीद है कि इस बार रेपो रेट में  25 आधार अंकों कटौती कर  6.25 प्रतिशत किया जा सकता है। फरवरी 2023 से रेपो रेट को 6.5 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया है। इससे पहले 2020 में कोविड महामारी के दौरान ब्याज दरों में कटौती की गई थी, लेकिन इसके बाद धीरे धीरे कर ब्याज दरों को 6.5 प्रतिशत बढ़ा दिया गया।  यदि कटौती की घोषणा होती है तो, एक लंबे समय के बाद ब्याज दरों में कटौती होगी तो इससे आम आदमी को होम लोन, वाहन, पसर्नल लोन की ईएमआई में राहत मिल सकती है। सस्ते कर्ज से लोगों पर से ईएमआई का बोझ कम होगा।

रेपो रेट में हुई कटौती को आम लोगों को मिलेगी राहत

टैक्स विशेषज्ञ एवं वरिष्ठ सीए संजीव महेश्वरी बताते हैं यदि ऐसा होता है तो एक लंबे समय के बाद ब्याज दरों में कटौती होगी। जिससे आम आदमी को होम लोन, पसर्नल लोन की ईएमआई में राहत मिल सकती है। ब्याज दरों में कटौती वजह से सस्ते कर्ज से लोगों पर से ईएमआई का बोझ कम होगा। लेकिन इस कटौती के बाद बैंकस अपनी लेडिंग रेट पर किस तहर की कटौती करते हैं यह उन पर निर्भर करेगा। प्रत्येक बैंक पूरी कटौती नहीं देती है, बैंक अपनी वित्तीय स्थिति को देखते हुए अपनी ब्याद दरों को कम करती है, इससे भी देखना होगा। हालांकि यह कटौती खपत को बढ़ावा देगी। वे कहते हैं सरकार इस समय अपने खर्चों यानीअपना पूंजीगत व्यय कम करके आम लोगों के हाथों में पैसा दे रही है, जिससे घरेलू खपत को बढ़ाने के साथ धीमी होती अर्थव्यव्स्था को गति मांग को बढ़ाया जा सके।  इसलिए बजट 12 लाख रुपये की आय वालों को कर में छूट दी गई है। हमें उम्मीद है कि आरबीआई इस बार मॉनेटरी पॉलिसी में कटौती कर सकती है।

25 आधार अंकों की कटौती से कितनी होगी ईएमआई

यदि किसी ने 50 लाख रुपये का लोन 8.5 प्रतिशत की ब्याज दर से 20 साल के लिए लिया है और आरबीआई यदि 0.25 प्रतिशत की कटौती की घोषणा करती है तो उसकी ईएमआई कम हो जाएगी, जैसे कि पुराने ब्याज दर  8.5 प्रतिशत पर 43,391 रुपये की ईएमआई देनी पड़ती है, और ब्याज दरों पर कटौती के बाद नई ब्याज 8.25 प्रतिशत पर 42,603 रुपये हो जाएगी, जिसमें महीने में 788 रुपये की बचत और साल भर में 9,456 रुपये की बचत होगी। यदि आप ने 5 लाख रुपये का कार लोन 12 प्रतिशत की ब्याज दर पर लिया है तो 11,282 रुपये पुरानी ईएमआई पर देने पड़ रहे हैं, यदि कटौती हुई तो कार लोन की नई ईएमआई 11,149 रुपये होगी। जिसमें 133 रुपये महीने के और साल भर में 1,596 रुपये की बचत होगी।  

एमपीसी से ब्याज दरों में कटौती करने की उम्मीद क्यों? 

इकोनॉमी रिसर्च संस्था पीएल कैपिटल ग्रुप के अर्थशास्त्री अर्श मोगरे कहते हैं कि इस समय कई कारण है जिसकी वजह से 25 आधार अंकों की कटौती की गुंजाईश दिखाई देती है। इसमें पहला कारण मुद्रास्फीति तो कम हो रही है (दिसंबर 2024 खुदरा महंगाई दर यानी सीपीआई: 5.2 प्रतिशत आने वाले महीनों में 4.5 प्रतिशत-4.7 प्रतिशत तक गिरने की उम्मीद है), लेकिन डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट के कारण आयात से जुड़ी मुद्रास्फीति से जोखिम बना हुआ है। दूसरा कारण विकास की गति धीमी हो रही है, (वित्त वर्ष 25 में जीडीपी 6.4% बनाम वित्त वर्ष 24 में 8.2 प्रतिशत अनुमानित है), जो कमजोर निवेश के साथ कम खपत बड़ी परेशानी बनी हुई है। तीसरा कारण लिक्विडिटी यानी तरलता कम हो रही है, जिसमें टिकाऊ तरलता घाटे में (40,000 करोड़ रुपये ), विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट (जनवरी 2025 में 14 बिलियन डॉलर), और ऋण वृद्धि 11.5 प्रतिशत साल दर साल पर स्थिर है। इसके अलावा वैश्विक जोखिम जो लगातार बने हुए हैं, (अमेरिकी फेड की दर अनिश्चित, व्यापार युद्ध के जोखिम बढ़ रहे हैं, पूंजी बहिर्वाह बढ़ रहा है) जिसके कारण आरबीआई को अधिक मौद्रिक ढील से बचना होगा जिसमें रुपया डॉलर के मुकाबले और कमजोर न हो, मौजूदा समस में रुपये डॉलर के मुकाबले 87 पर बना हुआ है।

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