भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से शुक्रवार को दो महीने के अंतराल पर होने वाली मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक के फैसलों का एलान किया गया। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। हालांकि, केंद्रीय बैंक का आगे का रुख कर्जदारों के लिए बेहद राहत भरा है।
गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि ट्रेजरी बिल्स यील्ड कर्व को प्रबंधित करने में मदद करेंगे और सरकार उचित दरों पर अपनी उधारी जुटाने में सक्षम होगी।
निवेश और करेंसी का हाल
बजट में डेटा सेंटर्स को लेकर की गई घोषणाओं पर गवर्नर ने कहा कि इससे देश में बड़े पैमाने पर विदेशी निवेश आने की उम्मीद है। वहीं, नकदी के चलन पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि पिछले एक साल में 'करेंसी इन सर्कुलेशन' में काफी बढ़ोतरी हुई है।
आरबीआई की यह नीति समीक्षा बताती है कि केंद्रीय बैंक का फोकस अब भी विकास को सहारा देने पर है। जहां कर्जदारों के लिए ईएमआई कम होने की उम्मीद बरकरार है, वहीं जमाकर्ताओं को गिरती ब्याज दरों के दौर के लिए तैयार रहना होगा।
सोने-चांदी की चमक ने बढ़ाई तपिश
आरबीआई ने पहली बार साफ तौर पर माना है कि कीमती धातुओं की कीमतें अब महंगाई को आकार देने में अहम भूमिका निभा रही हैं। एमपीसी के बयान के अनुसार, महंगाई के दृष्टिकोण में जो मामूली बढ़ोतरी की गई है, उसमें लगभग 60-70 बेसिस पॉइंट्स (0.60-0.70%) का योगदान केवल कीमती धातुओं की कीमतों में वृद्धि के कारण है।
गुरुवार को सोना 1.24% की गिरावट के बाद भी 1,48,860 रुपये प्रति 10 ग्राम के उच्च स्तर पर बंद हुआ। आरबीआई ने नोट किया कि वैश्विक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव के बीच निवेशक 'सेफ-हेवन' के तौर पर सोने का रुख कर रहे हैं, जिससे इसकी कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर बनी हुई हैं। भले ही हेडलाइन इन्फ्लेशन का अनुमान बढ़ाया गया हो, लेकिन आंतरिक महंगाई की स्थिति नियंत्रण में दिख रही है। कोर इन्फ्लेशन यानी यदि सोने और चांदी को हटा दिया जाए, तो मुख्य महंगाई 2.6% (दिसंबर के आंकड़ों के अनुसार) पर स्थिर बनी हुई है।