बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में तीन दिनों तक चली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के बाद बुधवार को नीतिगत फैसलों का एलान कर दिया गया है। केंद्रीय बैंक ने देश की मजबूत आर्थिक गतिविधियों के बीच महंगाई पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए रेपो रेट को 25 बेसिस प्वाइंट्स (0.25%) बढ़ा दिया है। फरवरी 2023 के बाद ब्याज दरों में की गई यह पहली बढ़ोतरी है। इसके साथ ही आरबीआई ने अपने नीतिगत रुख को बदलकर 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' कर दिया है, जिससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि निकट भविष्य में दरों में कटौती की कोई संभावना नहीं है।
तीन दिन चली एमपीसी बैठक के फैसलों का एलान करते हुए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा, "हमने अपना रुख बदलते हुए स्पष्ट कर दिया है कि निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती नहीं होगी। हम या तो ब्याज दरों में ठहराव लाने या बढ़ोतरी करने पर विचार कर रहे हैं। ब्याज दरों में कितनी बढ़ोतरी होगी, यह बदलती हुई व्यापक आर्थिक परिस्थितियों और विकास-मुद्रास्फीति के समीकरणों पर निर्भर करेगा।" गवर्नर ने बैंकों की ऋण वृद्धि और एनबीएफसी की परिसंपत्ति गुणवत्ता पर भी अपनी राय रखी। गवर्नर ने यूपीआई लेनदेन पर लगने वाले छोटे शुल्क के प्रभाव पर भी बात की।
गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि आगे चलकर बैंकों की ऋण वृद्धि मजबूत बनी रहेगी। उन्होंने बैंकिंग प्रणाली में उच्च तरलता की स्थिति के बीच एनबीएफसी के लिए परिसंपत्ति गुणवत्ता पर कोई समस्या नहीं देखी। एफसीएनआर(बी) योजना की प्रतिक्रिया व्यापक आर्थिक बुनियादी सिद्धांतों में मजबूती दिखाती है। मल्होत्रा ने विश्वास जताया कि बैंक धन का विवेकपूर्ण तरीके से उपयोग करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि बाहरी बाधाओं के कारण प्रवाह में कमी आई है। हालांकि, चालू खाते पर दबाव एक अस्थायी मुद्दा है। गवर्नर को विश्वास है कि भुगतान संतुलन जल्द ही सरप्लस में आ जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि बैंकिंग क्षेत्र में इतनी अधिक तरलता लंबे समय तक नहीं रहेगी।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने देश की व्यापक आर्थिक स्थिति पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि एफसीएनआर(बी) योजना की प्रतिक्रिया से मजबूत बुनियादी सिद्धांत दिखते हैं। गवर्नर ने बैंकों को धन का सावधानी से उपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने यह भी बताया कि बाहरी कारकों के कारण पूंजी प्रवाह में कमी आई है। हालांकि, चालू खाते पर दबाव को एक अस्थायी चुनौती बताया गया।
गवर्नर मल्होत्रा ने यूपीआई लेनदेन पर लगने वाले छोटे शुल्क पर भी बात की। उन्होंने कहा कि इस छोटे शुल्क का यूपीआई लेनदेन की मात्रा पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। बैंकिंग क्षेत्र में तरलता की स्थिति पर उन्होंने कहा कि यह लंबे समय तक उच्च अधिशेष में नहीं रहेगी। बैंकों की ऋण वृद्धि आगे भी मजबूत बनी रहने का अनुमान है। एनबीएफसी की परिसंपत्ति गुणवत्ता को लेकर कोई चिंता नहीं है।
रेपो रेट में कितना इजाफा हुआ है और यह फैसला कितना अहम है?
एमपीसी की बैठक में सर्वसम्मति से रेपो रेट को 25 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ाकर 5.5 प्रतिशत करने का निर्णय लिया गया। यह फरवरी 2023 के बाद से दरों में की गई पहली वृद्धि है। समिति के सभी छह सदस्यों ने एकजुट होकर दरें बढ़ाने के पक्ष में मतदान किया, जो मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के प्रति केंद्रीय बैंक की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
आरबीआई ने अपने नीतिगत रुख में क्या बड़ा बदलाव किया है?
रिजर्व बैंक ने अपने मौद्रिक नीति रुख को आधिकारिक तौर पर बदलकर 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' कर दिया है। इसका सीधा अर्थ है कि आने वाले समय में नीतिगत दरों में कटौती का विकल्प फिलहाल खत्म हो चुका है। भविष्य में आरबीआई का अगला कदम या तो रेपो रेट में और बढ़ोतरी करना होगा या फिर दरों को मौजूदा स्तर पर स्थिर रखना होगा।
देश की आर्थिक वृद्धि को लेकर केंद्रीय बैंक का क्या आंकलन है?
आरबीआई गवर्नर के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूत और जुझारू बनी हुई है। इसी मजबूती को देखते हुए आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए भारत की जीडीपी (जीडीपी) विकास दर के अनुमान को 40 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया है।
महंगाई दर और वैश्विक चुनौतियों पर आरबीआई ने क्या चेतावनी दी है?
आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपने मुद्रास्फीति के अनुमान को मामूली रूप से बढ़ाकर 5.2 प्रतिशत कर दिया है। इसके साथ ही चेतावनी दी गई है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और सप्लाई चेन में आ रही रुकावटों का असर घरेलू आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है।