भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की दिसंबर की मौद्रिक समीक्षा की बैठक आज यानी दो दिसंबर से शुरू होने वाली है। छह साल के शीर्ष पर पहुंची खुदरा महंगाई के दबाव में रिजर्व बैंक एक बार फिर नीतिगत दरें अपरिवर्तित रख सकता है। विशेषज्ञों ने कहा कि खुदरा मुद्रास्फीति की दर बढ़ने की वजह से मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) संभवत: एक बार फिर ब्याज दरों में बदलाव नहीं करेगी। केंद्रीय बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास की अगुवाई वाली छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति की दो दिन की बैठक आज से चार दिसंबर तक चलेगी।
बाजार विशेषज्ञों का दावा है कि दो से चार दिसंबर तक होने वाली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक में लगातार तीसरी बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होगा। अक्तूबर महीने में खुदरा महंगाई की दर 7.61 फीसदी पहुंच गई, जो साढ़े छह साल में सबसे ज्यादा है। खुदरा महंगाई लगातार छह महीने से आरबीआई के अनुमानित लक्ष्य छह फीसदी से ऊपर बनी हुई है। कोटक महिंद्रा बैंक की उपभोक्ता बैंकिंग प्रमुख शांति इंकबरम का कहना है कि इसी वजह से पिछली दो एमपीसी बैठक में रेपो रेट नहीं हटाया जा सका।
कोरोना संकट के बीच देश की अर्थव्यवस्था में चालू वित्त वर्ष 2020-21 की दूसरी तिमाही जुलाई-सितंबर में 7.5 फीसदी की गिरावट आई है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार इससे पूर्व वित्त वर्ष 2019-20 की इसी तिमाही में जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में 4.4 फीसदी की वृद्धि हुई थी। लिहाजा नीतिगत फैसले पर इसका भी दबाव रहता है। हालांकि
फरवरी से अब तक हुई 1.15 फीसदी कटौती
फरवरी से अब तक रेपो रेट में 1.15 फीसदी कटौती हो चुकी है। अगले कुछ महीने अर्थव्यवस्था के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है। अगर विकास दर सकारात्मक होती हैं तो एमपीसी बैठक में दरें घटाने पर फैसला हो सकता है।