टमाटर की आसमान छूती कीमतों ने घरों का बजट बिगाड़ दिया है। चिंताजनक बात यह है कि इसका अन्य उत्पादों की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है, जिससे महंगाई बढ़ने का जोखिम बना हुआ है। आरबीआई ने सोमवार को एक लेख में कहा, पिछले कुछ दिनों में टमाटर के दाम 250 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं।
इसका मुख्य कारण बारिश और कीटों के हमले के कारण टमाटर की फसल को होने वाला नुकसान है। खुदरा कीमतों में भारी वृद्धि के बीच केंद्र ने लोगों को राहत देने के लिए 80 रुपये प्रति किलोग्राम पर टमाटर बेचना शुरू कर दिया है। हालांकि, टमाटर के दाम घटने लगे हैं। सोमवार को इसकी अखिल भारतीय औसत कीमत लगभग 120 रुपये प्रति किलोग्राम रही। एजेंसी
आपूर्ति शृंखला में व्यापक सुधार की जरूरत
आरबीआई के डिप्टी गवर्नर माइकल देबब्रत पात्रा की अगुवाई वाली टीम के लेख के मुताबिक, समग्र महंगाई में अस्थिरता लाने में टमाटर की कीमतों का ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इसकी आसमान छूती कीमतों का खुदरा और थोक बाजारों में अन्य सब्जियों के दाम पर असर पड़ा है। पिछले कुछ वर्षों में कीमतों में बढ़ोतरी से समग्र महंगाई की अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए आपूर्ति शृंखला में सुधार की जरूरत है।
केंद्रीय बैंक ने की 7.37 अरब डॉलर की खरीदारी
आरबीआई ने मई, 2023 में 7.37 अरब डॉलर की खरीदारी की। अप्रैल में केंद्रीय बैंक ने शुद्ध रूप से 7.70 अरब डॉलर की खरीदारी की थी। उधर, मई में डॉलर के मुकाबले रुपये में एक फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली।
विकसित देश बनने को 7.6% की वृद्धि दर जरूरी
अगले 25 वर्षों में 7.6 फीसदी की औसत वार्षिक वास्तविक वृद्धि दर के साथ ही भारत 2047 तक एक विकसित देश बन सकता है। हालांकि, पूंजी भंडार, बुनियादी ढांचे और लोगों के कौशल के मौजूदा स्तर को देखते हुए यह कार्य आसान नहीं होगा।
केंद्रीय बैंक ने 'भारत@100' रिपोर्ट में कहा, विकसित देश बनने के लिए भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी को मौजूदा स्तर से 8.8 गुना बढ़ाने की जरूरत है। अभी प्रति व्यक्ति जीडीपी 2,500 डॉलर है, जिसे बढ़ाकर 22,000 डॉलर करना होगा।