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RBI Governor: नई आयकर व्यवस्था को लागू करने में मल्होत्रा की महत्वपूर्ण भूमिका, पीएम मोदी के पसंदीदा नौकरशाह

Tue, 10 Dec 2024 06:43 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

आम सहमति बनाने में माहिर मल्होत्रा ने नई आयकर व्यवस्था को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके पास वित्त से जुड़े कामकाज संभालने का लंबा तजुर्बा है। रिजर्व बैंक का कामकाज सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स देखते हैं। मल्होत्रा के पास इसका भी अनुभव है। इसलिए, वह आरबीआई गवर्नर की रेस में सबसे आगे रहे। 
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आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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आरबीआई के नए गवर्नर संजय मल्होत्रा अपने काम करने के तरीकों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पसंदीदा नौकरशाहों में गिने जाते हैं। उन्होंने 2024 का बजट बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। उनका शुमार वित्तीय मामलों में सुधारवादी और मजबूती से काम करने वाले अफसरों में होता है।  

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आम सहमति बनाने में माहिर मल्होत्रा ने नई आयकर व्यवस्था को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके पास वित्त से जुड़े कामकाज संभालने का लंबा तजुर्बा है। रिजर्व बैंक का कामकाज सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स देखते हैं। मल्होत्रा के पास इसका भी अनुभव है। इसलिए, वह आरबीआई गवर्नर की रेस में सबसे आगे रहे। आरईसी लि. चेयरमैन-एमडी रह चुके मल्होत्रा के के कार्यकाल में वेतनभोगी वर्ग को राहत देने वाली नई प्रत्यक्ष कर व्यवस्था लागू हुई। अप्रत्याशित लाभ कर भी उन्हीं के कार्यकाल में हटाया गया। 

वित्त मंत्री से भी अच्छे संबंध, विभिन्न क्षेत्रों में विशेषज्ञता
राजस्थान कैडर के 1990 बैच के आईएएस अधिकारी मल्होत्रा के पास वित्त व कराधान जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता के साथ सार्वजनिक नीति में 33 साल से अधिक का अनुभव है। आईआईटी कानपुर से कंप्यूटर विज्ञान में स्नातक व अमेरिका के प्रिंसटन विश्वविद्यालय से पब्लिक पॉलिसी में मास्टर मल्होत्रा के वित्त मंत्री से भी अच्छे संबंध हैं। उधर, दास उर्जित पटेल के इस्तीफे के बाद 12 दिसंबर, 2018 को 25वें गवर्नर बने थे। तीन साल के कार्यकाल के बाद सेवा विस्तार मिला था।
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उच्च महंगाई के बीच रेपो दर घटाने का रहेगा दबाव
मल्होत्रा को ऐसे समय में रिजर्व बैंक का गवर्नर बनाया गया है, जब केंद्रीय बैंक के सामने चुनौतियों की भरमार है। आरबीआई पर रेपो दरों में कटौती का दबाव है, क्योंकि जीडीपी की वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष की जुलाई-सितंबर अवधि में सात तिमाहियों के निचले स्तर 5.4 फीसदी पर आ गई। डॉलर के मुकाबले रुपया भी लगातार कमजोर हो रहा है। उच्च महंगाई ने भी नाक में दम कर रखा है।
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