भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मंगलवार को राज्य सरकारों को महत्वपूर्ण सलाह दी। उन्होंने विवेकपूर्ण उधार रणनीतियां अपनाने पर जोर दिया। साथ ही, खर्च की गुणवत्ता सुनिश्चित करने को भी कहा। गवर्नर ने राज्यों के दीर्घकालिक राजकोषीय स्वास्थ्य को बनाए रखने के महत्व पर प्रकाश डाला।
यह सलाह राज्य वित्त सचिवों के 36वें सम्मेलन में दी गई। गवर्नर ने राज्यों को स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी (SLBC) मंच का प्रभावी उपयोग करने को भी कहा। इस सम्मेलन में 27 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त सचिव शामिल हुए। केंद्रीय वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। महालेखा नियंत्रक और भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के अधिकारी भी इसमें शामिल हुए। भारतीय रिजर्व बैंक ने एक विज्ञप्ति में यह जानकारी दी। मल्होत्रा ने व्यय की गुणवत्ता बनाए रखने पर जोर दिया। यह राज्यों के दीर्घकालिक राजकोषीय स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।
राज्यों को किन नई प्रणालियों को अपनाना चाहिए?
गवर्नर ने राज्यों से कुशल नकदी प्रबंधन प्रथाओं को अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने विवेकपूर्ण उधार रणनीतियों की आवश्यकता पर भी बल दिया। मल्होत्रा ने राज्यों को यूनिफाइड लेंडिंग इंटरफेस (यूएलआई) में शामिल होने को कहा। उन्होंने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के लिए प्रोग्रामेबल सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (P-CBDC) का उपयोग करने का सुझाव दिया।
सम्मेलन में किन विषयों की समीक्षा की गई?
बैठक में राज्यों द्वारा बाजार उधार की समीक्षा की गई। रिजर्व बैंक से राज्यों को अल्पकालिक वित्तीय सहायता पर भी चर्चा हुई। राज्यों द्वारा बेंचमार्क इश्यूएंस रणनीति अपनाने पर भी विचार किया गया। ये सभी विषय राज्यों के वित्तीय प्रबंधन से संबंधित थे।
गवर्नर ने कौन सी नई पुस्तिका जारी की?
सम्मेलन के दौरान गवर्नर ने एक पुस्तिका जारी की। इसका शीर्षक 'राज्यों के लिए नकदी और ऋण प्रबंधन पर संग्रह' है। यह पुस्तिका प्रासंगिक अवधारणाओं को सारांशित करती है। इसमें परिचालन प्रक्रियाएं और अच्छी नकदी व ऋण प्रबंधन प्रथाएँ शामिल हैं। इसे संक्षिप्त और सुलभ प्रारूप में प्रस्तुत किया गया है।