फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

RBI Report: बैंकिंग धोखाधड़ी के मामले बढ़े, बाजार से गायब हो रहे 2000 के नोट, आरबीआई ने जारी की सालाना रिपोर्ट

Fri, 27 May 2022 05:06 PM IST
दीपक चतुर्वेदी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

RBI FY22 Report In Hindi: रिजर्व बैंक की सालाना रिपोर्ट में कहा गया कि वित्त वर्ष 22 में बैंकों ने 9,103 धोखाधड़ी के मामलों की सूचना दी, जिसमें 60,414 करोड़ रुपये शामिल थे। इसकी तुलना में वित्त वर्ष 2021 के आंकड़ों पर जर डालें तो भले ही धोखाधड़ी के मामलों की संख्या 7,359 रही थी और ठगी गई राशि 1.38 लाख करोड़ रुपये थी। 
विज्ञापन
आरबीआई सालाना रिपोर्ट - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को वित्त वर्ष 22 की अपनी सालाना रिपोर्ट पेश कर दी है। इसमें देश में बढ़ती महंगाई से लेकर निवेश के तरीकों का जिक्र किया गया है। इसके साथ ही रिपोर्ट में सामने आया कि वित्त वर्ष 2021 की तुलना में वित्त वर्ष 2022 में बैंकिंग धोखाधड़ी के मामलों में इजाफा हुआ है, हालांकि इन मामलों में शामिल राशि बीते साल कम रही। यानी धोखाधड़ी के मामले बढ़ने के बाद लोगों के नुकसान में कमी आई है। 

विज्ञापन


9103 बैंकिंग धोखाधड़ी के मामले
आरबीआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि अपराध की दुनिया में बैंकों को धोखा देने के मामले कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। वित्त वर्ष 2022 में भी बैंकिंग धोखाधड़ी के मामले तेजी से बढ़े है। रिपोर्ट की मानें तो बैंकिंग धोखाधड़ी, जिसमें ऋण लेने से लेकर ऑनलाइन लेन-देन तक के मामले शामिल हैं। इनकी संख्या में पिछले वित्त वर्ष में वृद्धि दर्ज की गई है, लेकिन इसमें शामिल राशि इससे पिछले वर्ष की तुलना में कम रही। इसमें कहा गया कि वित्त वर्ष 22 में बैंकों ने 9,103 धोखाधड़ी के मामलों की सूचना दी, जिसमें 60,414 करोड़ रुपये शामिल थे। 

ठगी गई राशि वित्त वर्ष 2021 से आधी
इसकी तुलना में वित्त वर्ष 2021 के आंकड़ों पर जर डालें तो भले ही धोखाधड़ी के मामलों की संख्या 7,359 रही थी, लेकिन इसमें ठगी गई राशि 1.38 लाख करोड़ रुपये थी। यानी वित्त वर्ष 2022 में ठगी गई राशि वित्त वर्ष 2021 की तुलना में आधे से भी कम है। आरबीआई की रिपोर्ट में साझा किए गए डाटा से पता चलता है कि निजी क्षेत्र के बैंकों ने वित्त वर्ष 2022 में सबसे अधिक धोखाधड़ी के मामलों की सूचना दी। रिपोर्ट से पता चलता है कि लेनदेन की संख्या में निजी क्षेत्र के बैंकों की हिस्सेदारी पिछले तीन वर्षों से हर साल बढ़ रही है। फिर भी कुल मामलों को देखें तो कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग धोखाधड़ी की हिस्सेदारी में वृद्धि दर्ज की गई है।
विज्ञापन


महंगाई को लेकर यह बड़ा दावा 
रिजर्व बैंक ने अपनी सालाना रिपोर्ट में महंगाई बढ़ने को लेकर कहा है कि थोक कीमतों पर आधारित मुद्रास्फीति (डब्ल्यूपीआई) का उच्च स्तर आने वाले समय में खुदरा महंगाई पर दबाव बढ़ाएगी। इसमें कहा गया कि कच्चे माल की कीमतें बढ़ना, परिवहन लागत में वृद्धि, आपूर्ति श्रृंखला का बाधित होना देश में महंगाई की मार को और बढ़ा रहे हैं। आरबीआई ने कहा है कि विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में लगातार तेजी के बीच थोक और खुदरा मुद्रास्फीति में बढ़ते अंतर की वजह से विनिर्माण लागत का दबाव कुछ समय बाद खुदरा मुद्रास्फीति पर पड़ने को जोखिम है। रिपोर्ट में इस समस्या के बढ़ने के लिए रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग को भी बढ़ा कारण बताया गया है। गौरतलब है कि देश में थोक महंगाई दर अप्रैल में 15.08 फीसदी के उच्च स्तर पर है, जबकि खुदरा महंगाई दर 7.79 फीसदी यानी आठ साल के उच्च स्तर पर पहुंच चुकी है। 

सोने में निवेश पर कही यह बात  
भारत समेत ज्यादातर देशों में सोने को निवेश का सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है। आरबीआई की रिपोर्ट में भी कहा गया है कि शेयर बाजारों में नुकसान की भरपाई करने के मामले में भी सोने का प्रदर्शन बेहतर रहा है और विशेषज्ञों की मानें तो सोने में निवेश पहले से ज्यादा सुरक्षित हो रहा है। रिपोर्ट में कहा गया कि आरबीआई ने बीते कुछ समय में सोने में अपनी खरीद में इजाफा किया है। वित्त वर्ष 2022 में केंद्रीय बैंक ने अपने स्वर्ण भंडार में 65.11 टन सोना जोड़ा है, जो कि किसी भी वित्त वर्ष में सबसे ज्यादा खरीदारी है। 

बाजार से गायब हो रहे 2000 के नोट
देश के बाजारो में 2000 रुपये के नोट अब गायब होते जा रहे हैं। भारतीय करेंसी में सबसे बड़े नोट के चलन में लगातार कमी आती जा रही है। दूसरे शब्दों में कहें तो मार्केट से 2000 के नोट गायब होते जा रहे हैं। आरबीआई की सालाना रिपोर्ट में कहा गया कि चलन में मौजूद कुल कुल नोट की संख्या का सिर्फ 1.6 फीसदी हिस्सा ही 2000 रुपये के बैंक नोट का है। इससे पहले वित्त वर्ष 2020-21 में चलन में मौजूद नोटों की संख्या में 2000 रुपये के नोटों की हिस्सेदारी दो फीसदी थी, जबकि उससे पिछले वित्त वर्ष में यह 2.4 फीसदी थी। इन आंकड़ों से साफ है कि बाजार में साल-दर-साल 2000 रुपये के नोटों का चलन घटता जा रहा है। चलन में मौजूद सभी नोट के मूल्य की बात करें तो इसमें 500 और 2000 रुपये के नोटों का 87 फीसदी से ज्यादा का हिस्सा है। सर्कुलेशन में मौजूद 2000 रुपये के नोट का कुल मूल्य सभी नोटों के मूल्य का फिलहाल 13.8 प्रतिशत है, जो कि पिछले साल 17.3 प्रतिशत था।
विज्ञापन

 

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें