फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

RBI: असुरक्षित कर्ज में वृद्धि पर आरबीआई ने जताई चिंता, वित्तीय स्थिरता को खतरा; मजबूत करनी होगी निगरानी

Sat, 07 Oct 2023 05:45 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

स्वामीनाथन ने चेतावनी दी कि बैंक व एनबीएफसी पर इस पर कार्रवाई नहीं करते हैं तो आरबीआई खुद इसकी जांच करेगा। पिछले दो वर्षों में कुल बैंकिंग कर्ज 12-14 फीसदी बढ़े हैं। इस दौरान असुरक्षित खुदरा कर्ज में 23 फीसदी वृद्धि हुई है, जो नियामक के लिए चिंता की बात है।
 
विज्ञापन
rbi - फोटो : istock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

खुदरा कर्ज खासकर पर्सनल लोन और अन्य असुरक्षित कर्ज में बेतहाशा वृद्धि पर आरबीआई ने चिंता जताई है। दास ने कहा कि बिना गारंटी वाले कर्ज वित्तीय स्थिरता के लिए खतरा हैं। ऐसे में हम उम्मीद करेंगे कि हालात पर नियंत्रण के लिए बैंक, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) और फिनटेक आंतरिक निगरानी तंत्र मजबूत करें। साथ ही, मजबूत जोखिम प्रबंधन भी लागू करें। केंद्रीय बैंक के डिप्टी गवर्नर जे स्वामीनाथन ने कहा, गवर्नर की इस संबंध में टिप्पणियां सिर्फ एक सलाह है।
विज्ञापन


स्वामीनाथन ने चेतावनी दी कि बैंक व एनबीएफसी पर इस पर कार्रवाई नहीं करते हैं तो आरबीआई खुद इसकी जांच करेगा। पिछले दो वर्षों में कुल बैंकिंग कर्ज 12-14 फीसदी बढ़े हैं। इस दौरान असुरक्षित खुदरा कर्ज में 23 फीसदी वृद्धि हुई है, जो नियामक के लिए चिंता की बात है।

पीएम विश्वकर्मा पीआईडीएफ योजना में
आरबीआई ने पीएम विश्वकर्मा को भुगतान अवसंरचना विकास कोष (पीआईडीएफ) योजना में शामिल करने का फैसला किया है। साथ ही, पीआईडीएफ योजना को दो साल के लिए 31 दिसंबर, 2025 तक बढ़ाने का प्रस्ताव है। प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले माह पीएम विश्वकर्मा योजना की शुरुआत की थी। इसमें कारीगरों को दिए जाने वाले कर्ज पर 8 फीसदी तक की सब्सिडी देने का प्रस्ताव है।
विज्ञापन


टोकनाइजेशन 
कार्ड डाटा के ‘टोकनाइजेशन’ की बढ़ती स्वीकार्यता को देखते हुए आरबीआई सीधे बैंक स्तर पर कार्ड-ऑन-फाइल टोकनाइजेशन सुविधाएं शुरू करने पर विचार कर रहा है। ग्राहक शिकायत निपटान तंत्र मजबूत करने के लिए आरबीआई आंतरिक लोकपाल योजना में बदलाव कर सकता है। 

लोगों ने खर्च किया, इसलिए बचत में आई गिरावट : पात्रा
घरेलू बचत के 2022-23 में पांच दशक के निचले स्तर पर आने पर आरबीआई ने कहा, कोरोना के बाद आवाजाही पर लगा प्रतिबंध खत्म हो गया। इससे लोगों ने खर्च करना शुरू किया है। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर माइकल पात्रा ने कहा, परिवारों की शुद्ध वित्तीय बचत में गिरावट में देनदारियों में वृद्धि भी शामिल है। इनमें से अधिकांश होम लोन हैं, जो अगले साल निवेश के रूप में दिखाई देंगे। पात्रा ने कहा, ऐतिहासिक रूप से औसत घरेलू बचत दर करीब 7.5 फीसदी थी। महामारी के दौरान यह कई कारकों के कारण बढ़ गई थी। इसमें प्रतिबंधों के कारण खर्च करने में असमर्थता और एहतियाती बचत भी शामिल थी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें