बैंकिंग प्रणाली में नकदी (लिक्विडिटी) के भारी सरप्लस को संतुलित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने तीन अलग-अलग किस्तों में ,d लाख करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी प्रतिभूतियों की ओपन मार्केट ऑपरेशन (ओएमओ) बिक्री नीलामी आयोजित करने की घोषणा की है। आरबीआई की इस कार्रवाई का पहला चरण 17 सितंबर 2026 से शुरू होने जा रहा है। एफसीएनआर बी) जमाओं में भारी बढ़ोतरी और सरकारी खर्चों के चलते बैंकिंग तंत्र में तरलता का स्तर 10.43 लाख करोड़ रुपये के विशाल आंकड़े तक पहुंच चुका है। ऐसे में वित्तीय बाजार में स्थिरता बनाए रखने और अतिरिक्त तरलता को सोखने के लिए रिजर्व बैंक की यह पहल बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
रिजर्व बैंक ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि वर्तमान और भविष्य की लिक्विडिटी स्थितियों की गहन समीक्षा के बाद ही 1,00,000 करोड़ रुपये की भारत सरकार की प्रतिभूतियों की ओएमओ बिक्री करने का निर्णय लिया गया है। आंकड़ों के मुताबिक, 10 सितंबर तक बैंकिंग प्रणाली में लिक्विडिटी का अधिशेष लगभग 10.43 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया है।
आरबीआई के नोटिफिकेशन के अनुसार, 1 लाख करोड़ रुपये की यह ओएमओ बिक्री तीन किस्तों में चरणबद्ध तरीके से संपन्न होगी:
17 सितंबर की पहली नीलामी में केंद्रीय बैंक जिन मुख्य सरकारी बॉन्ड्स और प्रतिभूतियों की बिक्री करेगा, उनमें निम्नलिखित शामिल हैं:
बैंकिंग तंत्र में तरलता में आए इस अचानक उछाल के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारक जिम्मेदार रहे हैं:
सितंबर महीने के दौरान तीन चरणों में आयोजित होने वाली यह ओएमओ बिक्री बैंकिंग प्रणाली में मौजूद अतिरिक्त तरलता को नियंत्रित करने में प्रभावी साबित होगी। 17, 21 और 28 सितंबर की नीलामियों के माध्यम से आरबीआई बाजार में नकदी के प्रवाह को संतुलित करेगा। रिज़र्व बैंक की यह त्वरित कार्रवाई दर्शाती है कि वह वित्तीय स्थिरता बनाए रखने और बैंकिंग प्रणाली में अत्यधिक लिक्विडिटी के कारण बनने वाली असमानताओं को समय रहते साधने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।