फिच ने कहा कि देश में आम चुनाव 11 अप्रैल से 19 मई, 2019 को हो रहा है। इसके कारण नीति एजेंडा को लेकर कुछ अस्थायी अनिश्चितता है। पिछले 30 साल विभिन्न राजनीतिक विचारधारा की सरकारों ने आम तौर पर सुधारों को आगे बढ़ाया है।
फिच ने एक बयान में कहा, ‘‘भारत की रेटिंग उच्च सार्वजनिक कर्ज, कमजोर वित्तीय क्षेत्र तथा संरचनात्मक सुधारों के मोर्चे पर पीछे रहने के मुकाबले एक मजबूत मध्यम अवधि वृद्धि परिदृश्य तथा सुदृढ़ विदेशी मुद्रा भंडार के कारण अपेक्षाकृत बाह्य मजबूती संतुलित करती है।’’
मजबूत वृद्धि परिदृश्य भारत के वित्तीय साख रूपरेखा को मदद करता रहेगा। फिच को उम्मीद है कि रिजर्व बैंक की नरम मौद्रिक नीति, बैंक नियमन में ढील तथा सरकारी खर्च से चालू वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर 6.8 प्रतिशत तथा अगले वित्त वर्ष में 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
रेटिंग एजेंसी ने देश की साख (इश्यूर डिफाल्ट रेटिंग) को स्थिर परिदृश्य के साथ ‘बीबीबी-’ पर बरकरार रखते हुए कहा, ‘कमजोर राजकोषीय स्थिति भारत की सरकारी साख के लिये बाधा बनी हुई है। इस संदर्भ में नई सरकार की मध्यम अवधि की राजकोषीय नीति का रेटिंग नजरिये से विशेष महत्व होगा।’