अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने भारत की इस साल की विकास दर के अनुमान को एक बार फिर से घटा दिया है। फिच रेटिंग्स ने अगले वित्त वर्ष के लिये देश की आर्थिक वृद्धि दर का पूर्वानुमान सात फीसदी से घटाकर 6.80 फीसदी कर दिया है।
फिच का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक अपनी अगली बैठक में रेपो रेट में और कटौती कर सकता है। थोक और खुदरा महंगाई दर के तीन फीसदी से नीचे रहने के कारण केंद्रीय बैंक की 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती करनी चाहिए। इससे लोगों को कर्ज की किश्त कम पड़ेगी और लोग ज्यादा से ज्यादा इसकी तरफ आकर्षित होंगे।
फिच रेटिंग्स के प्रमुख (एशिया प्रशांत) स्टीफन श्वार्ट्ज ने कहा कि रेटिंग प्रोफाइल के लिए दीर्घकालिक राजकोषीय संकेत अहम होते हैं। हम इसका मूल्यांकन चुनाव के बाद पेश होने वाले बजट के आधार पर करेंगे जिसमें मध्यम अवधि के परिदृश्य के बारे में अतिरिक्त संकेत मिलने चाहिए। फिच ने नवंबर में भारत की रेटिंग स्थिर परिदृश्य के साथ बीबीबी (नकारात्मक) बनाए रखा था। यह निवेश योग्य सबसे निचली रेटिंग है।