देशभर में मुकदमों की लंबित स्थिति को देखकर भारतीय उद्योग संघ ने 'तत्काल सुधार' की जरूरत का सुझाव दिया है। इसके साथ राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड राज्यों को मुकदमा निपटान दर के आधार पर वास्तविक समय में रैंकिंग दें, ताकि विवादों के निपटारे में तेजी लाई जा सके।
भारतीय उद्योग संघ (सीआईआई) ने रविवार को देशभर में मुकदमों की बढ़ते लंबित स्थिति को लेकर 'तत्काल सुधार' की जरूरत पर जोर दिया और सुझाव दिया कि राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड (एनजेडीजी) राज्यों को मुकदमा निपटान दर के आधार पर वास्तविक समय में रैंकिंग प्रदान करे, ताकि विवादों के निपटारे में तेजी लाई जा सके। सीआईआई ने कहा, देश में कई अदालतों में पांच करोड़ से ज्यादा मुकदमे लंबित हैं और कई जगहों पर मुकदमा निपटाने की दर नई दाखिलियों से पीछे चल रही है, जिससे मुकदमों के निपटारे में सुधार के लिए जल्द ही सुधार की जरूरत है।
'इससे प्रभावी न्यायिक सुधार कर सकेंगे लागू'
सीआईआई ने राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड (एनजेडीजी) को लंबित मुकदमों को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल बताया, क्योंकि यह डेटा-आधारित नीति हस्तक्षेप को सक्षम बनाता है। इसका उद्देश्य राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा की भावना को बढ़ावा देना है, ताकि वे अपनी न्यायिक प्रक्रिया को सुधारें और सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाएं। सीआईआई ने कहा कि शुरुआत में, राज्यों को मुकदमा निपटान दर (मुकदमों के निपटाने और दाखिलियों का अनुपात) के आधार पर रैंक किया जा सकता है। यह रैंकिंग पिछले 5-10 वर्षों के लिए प्रदर्शित की जा सकती है। इससे राज्य अपनी न्यायिक प्रक्रियाओं को तेज कर सकेंगे और अधिक प्रभावी न्यायिक सुधार लागू कर सकेंगे।
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राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड 2015 में शुरू किया गया था और इसका उद्देश्य अदालतों में मुकदमों की लंबित केसों को ट्रैक करना, प्रबंधित करना और कम करना है। यह एक सार्वजनिक पोर्टल है, जो भारतीय अदालतों में मुकदमों की स्थिति, लंबित, और निपटान से संबंधित डेटा उपलब्ध कराता है।
एनजेडीजी की कार्यप्रणाली में सुधार की आवश्यकता- CII
सीआईआई ने यह भी कहा कि एनजेडीजी को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए इसकी कार्यप्रणाली में सुधार की आवश्यकता है। इसमें मुकदमों के विभिन्न चरणों में कितनी देर लगती है, यह ट्रैक करने की आवश्यकता है। इस तरह से डेटा-आधारित नीति हस्तक्षेप को और बेहतर बनाया जा सकता है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में सुधार हो सके।