सवाल: राजस्व में हेराफेरी का यह आरोप कितना बड़ा है?
जवाब: आरोपों का पैमाना चौंकाने वाला है। सेबी के अनुसार, राजेश एक्सपोर्ट्स ने वित्त वर्ष 2021 से 2025 के बीच लगभग 15.15 लाख करोड़ रुपये के राजस्व को गलत तरीके से प्रस्तुत किया। नियामक ने यह भी बताया कि यह आंकड़ा इस अवधि के दौरान कंपनी की ओर से रिपोर्ट किए गए कुल राजस्व का लगभग 99.8% है। सेबी के मुताबिक, आरईएल का लगभग 97-99 प्रतिशत राजस्व बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया था, जो कि अभूतपूर्व है।
सवाल: राजेश मेहता कौन हैं और उनकी कंपनी का अब तक का सफर कैसा रहा है?
जवाब: 60 वर्षीय राजेश मेहता का जन्म 20 जून 1964 को बेंगलुरु में हुआ था। उन्होंने 1980 के दशक की शुरुआत में अपने सबसे बड़े भाई से मात्र 1,200 रुपये उधार लेकर अपने भाई प्रशांत के साथ चांदी के आभूषणों का कारोबार शुरू किया था। 1995 में कंपनी ने अपना आईपीओ लाकर 10 करोड़ रुपये जुटाए और पूंजी बाजार में कदम रखा। कंपनी को सबसे बड़ी वैश्विक पहचान साल 2015 में मिली जब उसने 400 मिलियन डॉलर के ऑल-कैश डील में स्विस रिफाइनरी 'वालकैम्बी' का अधिग्रहण किया। फोर्ब्स के अनुसार, अक्तूबर 2019 तक मेहता की कुल संपत्ति 1.57 बिलियन डॉलर आंकी गई थी।
शेयर बाजार नियामक सेबी
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सवाल: इस पूरे विवाद में कंपनी के ऑडिटर्स की क्या भूमिका रही?
जवाब: सेबी ने अपने आदेश में आरईएल के वैधानिक ऑडिटर्स के असहयोग के बारे में भी बताया है। आदेश के मुताबिक, ऑडिटर्स ने पूछताछ के दौरान ऑडिट वर्किंग पेपर उपलब्ध कराने का वादा किया था, लेकिन वे ऐसा करने में विफल रहे। सेबी का कहना है कि इस तरह का लगातार असहयोग महत्वपूर्ण जानकारी को छिपाने और जांच में बाधा डालने के इरादे को दर्शाता है। इसके अलावा, सेबी की ओर से बार-बार समन भेजे जाने के बावजूद कंपनी ने भी फंड फ्लो को समझाने वाले सही वित्तीय दस्तावेज पेश नहीं किए।
सवाल: निवेशकों और एलआईसी पर इस फैसले का क्या असर हुआ है?
जवाब: सेबी के इस आदेश का सीधा असर शेयर बाजार पर दिखा है। राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में 5% की तेज गिरावट दर्ज की गई। इस विवाद का असर भारतीय जीवन बीमा निगम पर भी पड़ा है, क्योंकि नवीनतम शेयरधारिता डेटा के अनुसार, एलआईसी की इस कंपनी में 10.80% की बड़ी हिस्सेदारी है। नतीजतन, एलआईसी के शेयरों में भी 1% से अधिक की गिरावट देखने को मिली।
सवाल: कंपनी ने इस पूरे मामले पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
जवाब: राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड ने गुरुवार को पूंजी बाजार नियामक सेबी द्वारा लगाए गए राजस्व वृद्धि के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह आदेश अंतरिम है और कंपनी द्वारा घोषित राजस्व सही है। कंपनी ने एक बयान में कहा, "कंपनी द्वारा घोषित राजस्व सही है और राजस्व को बढ़ा-चढ़ाकर नहीं दिखाया गया है।" कंपनी ने अपने जवाब में कहा है कि सेबी का आदेश अंतरिम है और नियामक द्वारा किसी भी पहलू पर कोई प्रतिकूल निष्कर्ष नहीं निकाला गया है। कंपनी ने कहा, "एसईबीआई और कंपनी के बीच कुछ संचार की कमी और भ्रम प्रतीत होता है। कंपनी सभी आवश्यक और प्रासंगिक दस्तावेज जमा करके एसईबीआई को सभी पहलुओं को स्पष्ट करने की प्रक्रिया में है।"
राजेश एक्सपोर्ट्स का यह मामला कॉरपोरेट गवर्नेंस और वित्तीय रिपोर्टिंग की पारदर्शिता पर बहुत गंभीर सवाल खड़े करता है। एक समय पर वैश्विक स्तर पर विस्तार करने वाली इस कंपनी और इसके निवेशकों का भविष्य अब सेबी की आगे की जांच और नियामक प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगा।