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कोरोना में रेलवे को मिले खाली ट्रैक, 167 साल के इतिहास में माल ढुलाई कर बनाया नया कीर्तिमान

Tue, 23 Feb 2021 06:38 PM IST
Harendra Chaudhary राहुल संपाल, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

1 अप्रैल 2020 से 12 फरवरी 2021 के दौरान माल ढुलाई से रेलवे को 99 हजार 605 करोड़ रुपये की कमाई हुई। जो बीते वर्ष 1 अप्रैल 2019 से 11 फरवरी 2020 की कमाई 98 हजार 833 करोड़ से 0.8 फीसदी ज्यादा है...
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indian railway - फोटो : Agency (File Photo)
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कोरोना महामारी के दौरान भारतीय रेलवे माल परिवहन का सर्वाधिक पसंदीदा परिवहन बनकर सामने आया है। देशभर में कम पैसेंजर ट्रेनों के चलाए जाने से मालगाड़ियों के लिए ट्रैक खाली मिल रहा है। इससे पहले की तुलना में ज्यादा और तेजी से सामान एक से दूसरे स्थान तक पहुंचाया जा रहा है। इसका परिणाम ये है कि रेलवे ने जनवरी 2021 में अपने 167 साल के इतिहास में सबसे अधिक, 119.79 मिलियन टन माल ढुलाई कर एक नया कीर्तिमान बनाया है।

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भारतीय रेलवे से मिले आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2021 में रेलवे ने रिकार्ड 119.79 मिलियन टन सामान की ढुलाई की है। इससे पहले रेलवे ने मार्च 2019 में 119.74 मिलियन टन सामान की ढुलाई की थी। 01 अप्रैल 2020 से 12 फरवरी 2021 के दौरान माल ढुलाई से रेलवे को 99 हजार 605 करोड़ रुपये की कमाई हुई। जो बीते वर्ष 1 अप्रैल 2019 से 11 फरवरी 2020 की कमाई 98 हजार 833 करोड़ से 0.8 फीसदी ज्यादा है।

फरवरी 2021 के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय रेलवे का लदान 30.54 मिलियन टन था। इसमें 13.61 मिलियन टन कोयला, 4.15 मिलियन टन, लौह अयस्क, 1.04 मिलियन टन, खाद्यान्न, 1.03 मिलियन टन, उर्वरक, 0.96 मिलियन टन खनिज तेल और 1.97 मिलियन टन सीमेंट (क्लिंकर को छोड़कर) शामिल है।
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भारतीय रेलवे द्वारा माल ढुलाई को आकर्षक बनाने के लिए कई रियायतें और छूट भी दी जा रही हैं। इसके अलावा, नए व्यवसाय को आकर्षित करने और अन्य मौजूदा ग्राहकों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से रेल मंत्रालय ने लौह और इस्पात, सीमेंट, बिजली, कोयला, ऑटोमोबाइल और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी सेवा प्रदाताओं के शीर्ष नेतृत्व के साथ बैठकें भी कर रहा है।

यही नहीं, जोनल और मंडल स्तरों पर बिजनेस डेवलपमेंट यूनिट्स और माल ढुलाई की गति को दोगुना करने का भी रेलवे प्रयास कर रहा है। गौरतलब है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2021 में भारतीय रेलवे के 1,10,055 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की है। इसमें 1,07,100 करोड़ रुपये केवल पूंजीगत व्यय के लिए है।

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