पेशेवर सीईओ के वेतन में साल 2019-20 में वृद्धि हुई। जबकि महामारी से पहले उनके प्रमोटर समकक्षों की औसत तनख्वाह आर्थिक मंदी के कारण कम हुई है। हालांकि, प्रमोटर सीईओ को अपने पेशेवर समकक्षों की तुलना में औसतन 62 फीसदी ज्यादा मुआवजा मिला।
6.5 फीसदी बढ़ा पेशेवर सीईओ का औसत वेतन
टीओआई द्वारा कमीशन ईएमए पार्टनर्स के अध्ययन 'मिलियन-डॉलर सीईओ क्लब' के अनुसार, साल 2019-20 में पेशेवर सीईओ का औसत वेतन 6.5 फीसदी बढ़कर 13 करोड़ रुपये हो गया। वहीं उनके प्रमोटर समकक्षों का औसत वेतन नौ फीसदी घटकर 21 करोड़ रुपये रहा। यह अध्ययन बीएसई 200 कंपनियों के सैंपल पर आधारित है और इसमें स्टॉक विकल्प शामिल नहीं हैं। अध्ययन में 2019-20 के लिए कंपनियों की बैलेंस शीट में मुआवजे के विवरण को ध्यान में रखा गया।
150 हुई एक मिलियन डॉलर कमाने वाले CXO की संख्या
एक मिलियन डॉलर (सात करोड़ रुपये) कमाने वाले सीएक्सओ की संख्या पिछले साल के 146 से बढ़कर 150 हो गई है। इस क्लब का नेतृत्व 87.5 करोड़ रुपये के मुआवजे के साथ मारंस (कलानिथि मारन और कावेरी कलानिथि) कर रहे हैं।
कुल सीईओ में से 81 पेशेवर सीईओ हैं और 69 प्रमोटर हैं। कुल मिलाकर पेशेवर मुआवजे में 1.5 फीसदी की वृद्धि हुई है, जबकि प्रमोटर मुआवजे में लगभग तीन फीसदी की वृद्धि हुई है।
इस संदर्भ में ईएमए पार्टनर्स इंडिया के एमडी के सुदर्शन ने कहा कि, 'पिछले 12 महीनों के रुझान से पता चलता है कि हमने पेशेवर सीईओ के मुआवजे में वृद्धि देखी है। हमारा मानना है कि इसमें धीरे-धीरे सुधार आएगा।'
जेएसडब्ल्यू के प्रवर्तक सज्जन जिंदल का मुआवजा 2019-20 में लगभग 44 फीसदी कम होकर 39 करोड़ रुपये हो गया। वहीं डिवी लैबोरेटरीज की मुरली डिवी का मुआवजा लगभग 12 फीसदी घटकर 52 करोड़ रुपये हो गया है, जबकि श्री सीमेंट के एचएम बांगुर का मुआवजा 2019-20 में लगभग 10 फीसदी घटकर 42 करोड़ रुपये हो गया है।
हालांकि, बजाज ऑटो के राजीव बजाज के मुआवजे में लगभग 40 करोड़ रुपये (23 फीसदी) से अधिक का उछाल आया है। पेशेवर सीईओ में से हिंडाल्को के एमडी सतीश पई का मुआवजा 11 फीसदी बढ़कर 32 करोड़ रुपये हो गया। हिंदुस्तान यूनिलीवर के सीएमडी संजीव मेहता का वेतन लगभग 24 फीसदी बढ़कर 16 करोड़ रुपये हो गया। इस दौरान रोहित फिलिप को 48 करोड़ रुपये का दिया गया। उन्होंने इंडिगो की पेरेंट कंपनी इंटरग्लोब एविएशन में सीएफओ के पद से इस्तीफा दे दिया था
कंसाई नेरोलैक पेंट्स के वीसी और एमडी एचएम भरुका ने कहा कि, 'अगर भारत को विकसित होना है, तो मिलियन-डॉलर के सीएक्सओ की संख्या में वृद्धि होनी चाहिए। मुझे यकीन है कि कॉरपोरेटाइजेशन ऊपर जाएगा।' भरुका खुद भी क्लब का हिस्सा हैं।
प्रमोटर की औसत सैलरी (वित्त वर्ष 19 में 23 करोड़ रुपये) और पेशेवर सीईओ की औसत सैलरी ( वित्त वर्ष 19 में 12 करोड़ रुपये) के बीच का अंतर लगभग दोगुना था, यह अब 62 फीसदी तक कम हो गया है। भरुका ने कहा कि जिम्मेदारियों के मामले में पेशेवर और प्रमोटर सीईओ की भूमिका में कोई अंतर नहीं होता है। इसलिए एक पेशेवर सीईओ और एक प्रमोटर सीईओ के मुआवजा में सिर्फ स्वामित्व के कारण अंतर बहुत ज्यादा नहीं होना चाहिए।