इलेक्ट्रिक वाहनों (ई-वाहनों) के भारत में उत्पादन से कच्चे माल, खनिज प्रसंस्करण और बैटरी निर्माण के लिए देश की निर्भरता चीन पर बढ़ जाएगी। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने एक रिपोर्ट में दावा किया कि विश्व स्तर पर बनने वाली हर चार बैटरी में तीन का निर्माण चीन करता है।
भारत में ई-वाहनों के विनिर्माण में लगने वाले करीब 70 फीसदी कच्चे माल चीन और अन्य देशों से मंगवाए जाते हैं। ऑस्ट्रेलिया व दक्षिण अमेरिका में सबसे बड़ी लिथियम खदानें चीन के अधिकार में हैं। यह विश्व स्तर पर उत्पादित लिथियम का 60 फीसदी से अधिक का प्रसंस्करण करता है। रिपोर्ट में ई-वाहनों से जुड़े 13 मुद्दों की पहचान की गई है, जो उपभोक्ताओं, उद्योग व सरकार के हितों से जुड़े हैं और जिनका आकलन करना चाहिए।
दीर्घकालिक असर पर देना होगा ध्यान
जीटीआरआई के सह-संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, लिथियम आयन बैटरी वाले ई-वाहनों को लेकर प्रयोग अभी चल ही रहे हैं। हमें रोजगार, प्रदूषण स्तर, आयात और आर्थिक वृद्धि पर इस प्रकार के वाहनों के दीर्घकालिक असर को समझना होगा क्योंकि बैटरी निर्माण, निस्तारण एवं चार्जिंग के दौरान प्रदूषक तत्व निकलते हैं।
मारुति-ह्यूंडई की हिस्सेदारी घटी, टाटा मोटर्स और महिंद्रा में उछाल
देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया व ह्यूंडई मोटर इंडिया की बाजार हिस्सेदारी फरवरी, 2023 में घटी है। टाटा मोटर्स, महिंद्रा और किआ इंडिया की बाजार हिस्सेदारी में सालाना आधार पर बढ़ोतरी हुई है।
फाडा की रिपोर्ट : होंडा कार्स, रेनो, एमजी मोटर और निसान मोटर में भी आई है गिरावट
फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (फाडा) ने मंगलवार को कहा, पिछले माह मारुति की बाजार हिस्सेदारी मामूली घटकर 41.40 फीसदी रह गई। फरवरी, 2022 में यह 42.36 फीसदी थी। ह्यूंडई की बाजार हिस्सेदारी 14.95 फीसदी से घटकर 13.62 फीसदी रह गई। हालांकि, टाटा मोटर्स की बाजार हिस्सेदारी 13.16% से बढ़कर 13.57 फीसदी और महिंद्रा एंड महिंद्रा की 7.06% से बढ़कर 10.22% पहुंच गई। किआ इंडिया की हिस्सेदारी भी 5.27% से बढ़कर 6.81 फीसदी पहुंच गई।