ई-कॉमर्स क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों अमेजन और फ्लिपकार्ट के खिलाफ कथित गड़बड़ियों की जांच के भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग के आदेश को चुनौती देने वाली उनकी याचिकाओं को कर्नाटक उच्च न्यायालय में स्थानांतरित की जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार यह बात कही।
न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने सीसीआई की ओर से दायर याचिका पर नोटिस जारी किया। याचिका में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की ओर से दायर याचिकाओं को उच्च न्यायालयों से शीर्ष अदालत या दिल्ली उच्च न्यायालय में स्थानांतरित करने की मांग की गई थी।
पीठ ने कहा, "नोटिस जारी करें। प्रथम दृष्टया हमारा विचार है कि विभिन्न उच्च न्यायालयों में लंबित सभी मामलों को सुनवाई के लिए कर्नाटक उच्च न्यायालय में स्थानांतरित किया जाना चाहिए।" अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख 6 जनवरी, 2025 तय की है।
हालांकि, शीर्ष अदालत ने कर्नाटक उच्च न्यायालय से ई-कॉमर्स दिग्गजों की दायर याचिकाओं पर सुनवाई आगे न बढ़ाने को कहा। सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमानी ने कहा कि यदि मामले की सुनवाई कर्नाटक उच्च न्यायालय की ओर से की जाती है तो सीसीआई को कोई आपत्ति नहीं होगी।
शीर्ष अदालत के समक्ष अपनी याचिका में सीसीआई ने इलाहाबाद, मद्रास, तेलंगाना, पंजाब व हरियाणा, दिल्ली और कर्नाटक उच्च न्यायालयों में लंबित मामलों को या तो सर्वोच्च न्यायालय या दिल्ली उच्च न्यायालय में स्थानांतरित करने के निर्देश देने की मांग की थी। निष्पक्ष व्यापार नियामक सीसीआई ने फ्लिपकार्ट और अमेजन के खिलाफ कथित कदाचार के लिए जांच का आदेश दिया है। कंपनियों को उनके प्लेटफार्मों पर भारी छूट और पसंदीदा विक्रेताओं के साथ गठजोड़ के आरोप हैं।
सीसीआई ने जांच का आदेश दिल्ली व्यापार महासंघ की शिकायत के बाद दिया, जिसके सदस्यों में स्मार्टफोन और संबंधित सहायक उपकरणों का कारोबार करने वाले कई व्यापारी शामिल हैं। सीसीआई के आदेश के बाद, अमेजन और फ्लिपकार्ट ने जांच को चुनौती देते हुए विभिन्न उच्च न्यायालयों में अलग-अलग याचिकाएं दायर कीं।