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Crisil: निजी क्षेत्र की रक्षा कंपनियों में दो अंकों की वृद्धि दर का अनुमान, ऑर्डर बुक पर क्रिसिल का यह दावा

Tue, 23 Sep 2025 01:52 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

क्रिसिल रेटिंग्स के अनुसार भारत की निजी रक्षा कंपनियों में 2025-26 में मजबूत घरेलू मांग के कारण राजस्व में मजबूत वृद्धि देखने को मिलेगी। रिसर्च और विकास (आरएंडडी) और पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) में निवेश ने कंपनियों की क्षमताओं को मजबूत किया है। इससे उन्हें बड़े ऑर्डर हासिल करने में मदद मिली। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
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विस्तार
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भारत की निजी रक्षा कंपनियों की वृद्धि जारी रहेगी। क्रिसिल रेटिंग्स के अनुसार 2025-26 में मजबूत घरेलू मांग के कारण राजस्व में मजबूत वृद्धि देखने को मिलेगी। रेटिंग एजेंसी को उम्मीद है कि निजी रक्षा कंपनियां 16 से 18 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज करेंगी। यह वित्त वर्ष 2022 और 2025 के बीच 20 प्रतिशत की सीएजीआर के बाद है। 

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सरकार के समर्थन से निजी निवेश को मिला बढ़ावा

क्रिसिल के अनुसार मजबूत विकास गति को सरकार द्वारा महत्वपूर्ण नीतिगत प्रोत्साहन से समर्थन मिला है। इससे बड़े पैमाने पर निजी निवेश आकर्षित हुआ है। रिसर्च और विकास (आरएंडडी) और पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) में निवेश ने कंपनियों की क्षमताओं को मजबूत किया है। इससे उन्हें बड़े ऑर्डर हासिल करने में मदद मिली। 

ऑपरेटिंग मार्जिन 18 से 19 प्रतिशत के बीच रहने की उम्मीद

एजेंसी ने कहा है कि निजी रक्षा कंपनियों की लाभप्रदता स्थिर रहने की उम्मीद है, जिसमें ऑपरेटिंग मार्जिन 18 से 19 प्रतिशत के बीच रहेगा। पिछले तीन वित्तीय वर्षों में हुई इक्विटी निवेशों के चलते बैंलेंस शीट मजबूत बनी हुई है, भले ही कार्यशील पूंजी का कर्ज और पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) योजनाएं बढ़ रही हों।

रक्षा उद्योग में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां है प्रमुख 

एजेंसी ने 25 से अधिक निजी रक्षा कंपनियों का विश्लेषण किया, जो कुल उद्योग राजस्व का लगभग आधा योगदान देती हैं। वहीं भारत की रक्षा उद्योग में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां प्रमुख हैं, निजी कंपनियों का राजस्व हिस्सा लगातार बढ़ रहा है।

इन कारकों ने कंपनियों के लिए अवसर किए पैदा

सरकार की घरेलू खरीद और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने वाली नीतियों के साथ-साथ भू-राजनीतिक अस्थिरताओं के कारण सैन्य खर्च में वृद्धि ने निजी कंपनियों के लिए अवसर पैदा किया है। इस प्रवृत्ति ने आईपीओ और प्राइवेट इक्विटी निवेश के माध्यम से बड़े पूंजी प्रवाह को आकर्षित किया है। इससे इस क्षेत्र में नवाचार और आरएंडडी को सहज रूप से वित्तपोषित किया जा सके।

वित्त वर्ष 2022 के अंत में 3,600 करोड़ रुपये का इक्विटी निवेश हुआ 

क्रिसिल रेटिंग्स की निदेशक जयश्री नंदकुमार ने कहा कि पिछले तीन वित्तीय वर्षों में, रक्षा कंपनियों ने वित्त वर्ष 2022 के अंत में 4760 करोड़ रुपये के नेटवर्थ आधार पर 3,600 करोड़ रुपये का इक्विटी निवेश देखा है। यह मुख्य रूप से सार्वजनिक पेशकश और निजी इक्विटी के माध्यम से हुआ है। नंदकुमार ने कहा कि ऐसी धनराशि का एक तिहाई हिस्सा कार्यशील पूंजी वित्तपोषण में चला गया, जबकि लगभग आधा हिस्सा पूंजीगत व्यय, आरएंडडी व नवाचार के लिए उपयोग किया गया। इससे निजी क्षेत्र की रक्षा कंपनियों की क्षमता में वृद्धि हुई और वे बड़े ऑर्डर हासिल करने में सक्षम हुईं।

बढ़ी हुई क्षमताओं के साथ, ऑर्डर बुक में लगातार सुधार होता रहेगा, खासकर आपातकालीन खरीद योजना और आत्मनिर्भर भारत, रक्षा अधिग्रहण नीति, और रक्षा उत्पादन एवं निर्यात संवर्धन रणनीति जैसी प्रमुख सरकारी पहलों के सहयोग से। ये नीतियां स्वदेशीकरण और निर्यात दोनों को प्रोत्साहित करती हैं।

चालू वित्त वर्ष में कुल ऑर्डर 55,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान

इस वित्त वर्ष के अंत तक कुल ऑर्डर बुक 55,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। यह वित्त वर्ष 2023-24 के अंत तक 40,000 करोड़ रुपये थी। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि ऑर्डर बुक विस्तार में सहायक क्षेत्रों में इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, C4 (कमांड, कंट्रोल, संचार, कंप्यूटर और इंटेलिजेंस) प्रणालियां, और एयरोस्पेस उपकरण और घटक आदि शामिल हैं।

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