फरवरी 2022 से जारी रूस और युक्रेन जंग के दौरान पश्चिमी देशों ने रूस पर कई तरह के आर्थिक प्रतिबंध लगा रहे हैं। इस बीच रूस भारत को सस्ती दरों पर पेट्रोलियम पदार्थ उपलब करा रहा है। अब भारत पर तेल बेच रहे रूस पर नकेल कसने की मंशा से अमेरिका और उसके सहयोगी देश तेल की कीमतों 65 डॉलर से 70 डॉलर प्रति बैरल का कैप लगाने की योजना बना रहे हैं।
सस्ते दामों पर भारत को तेल बेच रहे रूस पर नकेल कसने के लिए जी-7 समूह और यूरोपीय यूनियन जल्द की प्राइस कैप का एलान कर सकता है। अगर ऐसा होता है तो इसका असर भारत के रूस से तेल खरीदने पर पड़ सकता है। रूस के तेल पर प्राइस कैप लगाने की मंजूरी के लिए यूरोपीय यूनियन में शामिल सभी देशों के राजदूतों ने बुधवार को बैठक की और इसमें प्राइस कैप लेवल का प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव को जैसे ही मंजूरी मिलेगी, प्राइस कैप की घोषणा हो सकती है। अगर रूसी तेल पर प्राइस कैप लगाने की घोषणा होती है अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट दर्ज की जा सकती है।
इस बीच एमोरी फंड मैनेजमेंट इंक के सीईओ टेत्सु एमोरी ने कहा है कि चीन में शून्य कोरोना नीति के तहत जारी लॉकडाउन और उसके कारण महौल बिगड़ने से मांग से जुड़ी चिंता बढ़ी है। उधर चार दिसंबर को ओपीईसी देशों की बैठक होने वाली है। टेत्सु एमोरी ने कहा कि जब तक ओपीईसी देश उत्पादन कोटा में और कटौती पर सहमत नहीं होते हैं या अमेरिका अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार को फिर से बढ़ाने का कदम नहीं उठाता है तब तक तेल की कीमतों में नरमी रह सकती है। अक्टूबर 2022 में ओपीईसी देशों ने 2023 तक अपने उत्पादन लक्ष्य में 2 मिलियन बैरल प्रति दिन कटौती करने का फैसला लिया था।
यूक्रेन युद्ध के बाद से ही भारत रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीद रहा है। भारत को रूस से तेल की खरीदारी पर छूट मिल रही है। अमेरिका व पश्चिमी देशों के विरोध के बावजूद भारत और रूस के बीच तेल की लेन-देन जारी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अगर रूसी तेल पर प्राइस कैप लगाया जाता है तो उससे भारत भी प्रभावित होगा।