ब्याज दरों में कटौती बैंकिंग क्षेत्र के शुद्ध ब्याज मार्जिन (एनआईएम) के लिए निकट भविष्य में अनुकूल नहीं है। फिलिप कैपिटल की एक नई रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार बैंकों के शुद्ध ब्याज मार्जिन में वित्त वर्ष 2025 और 2026 के दौरान गिरावट देखने को मिलेगी, जबकि वित्त वर्ष 2027 में इसमें सुधार की उम्मीद है। शुद्ध ब्याज मार्जिन एक वित्तीय संकेतक है जो यह दर्शाता है कि एक बैंक या वित्तीय संस्था ने अपनी ब्याज आय और ब्याज व्यय के बीच से कितनी कमाई की है।
इसमें कहा गया कि फरवरी 2025 से अब तक रेपो रेट में 100 आधार अंकों की कटौती की गई है। साथ ही, प्रणाली में पर्याप्त तरलता लागत प्रतिस्पर्धी दरों पर जमा वृद्धि के लिए अनुकूल है। फिलिप कैपिटल के अनुसार आईसीआईसीआई बैंक, डीसीबी बैंक, एयू एसएफबी और एक्सिस बैंक जैसे बैंकों पर एनआईएम में गिरावट का असर न्यूनतम रहेगा। वहीं, एचडीएफसी बैंक और एसबीआई जैसे अन्य बैंकों पर इसका मामूली असर देखने को मिल सकता है। इसके विपरीत, इंडसइंड बैंक और बंधन बैंक पर ऋण पोर्टफोलियो में बदलाव के कारण सबसे अधिक असर झेलना पड़ सकता है।
हालांकि, रिपोर्ट यह भी दर्शाती है कि बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता में लगातार वृद्धि हो रही है। निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों के बैंकों में तनावग्रस्त परिसंपत्तियों में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2025 में क्रेडिट कॉस्ट दीर्घकालिक औसत से कम है, जो बेहतर अंडरराइटिंग मानकों और प्रभावी समाधान प्रक्रिया की ओर इशारा करती है।
पूर्व की बड़ी तनावपूर्ण घटनाएं जैसे कॉर्पोरेट एनपीए चक्र और कोविड के दौरान असुरक्षित ऋणों में वृद्धि अब लगभग समाप्त हो चुकी हैं। हालांकि, लो-टिकट असुरक्षित ऋणों में कुछ हद तक तनाव के संकेत अभी भी बने हुए हैं। माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र में शुरुआती स्तर का तनाव कम हुआ है और क्रेडिट कार्ड डिफॉल्ट भी चरम पर हैं, जिससे आने वाले समय में क्रेडिट कॉस्ट में राहत की संभावना है।
होम लोन की परिसंपत्ति गुणवत्ता स्थिर बनी हुई है, और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ने नए स्रोतों में अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाई है। इसी प्रकार वाहन ऋणों में भी तनाव नियंत्रित है, हालांकि वित्त वर्ष 2025 की शुरुआत में कुछ मामूली वृद्धि देखी गई है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वित्त वर्ष 2026 के दौरान बैंकिंग क्षेत्र की क्रेडिट ग्रोथ 11 से 12 प्रतिशत के स्तर पर रहने की उम्मीद है, जो कि नाममात्र जीडीपी वृद्धि की तुलना में 1.1 गुना अधिक होगी।
वित्त वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में असुरक्षित खुदरा ऋणों में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है, जिसका कारण तनाव में कमी और उधारकर्ताओं की बचत क्षमता में सुधार है। निजी बैंक, जो पहले विभिन्न खुदरा क्षेत्रों में बाजार हिस्सेदारी खो चुके थे, क्रेडिट जोखिम कम होने के साथ फिर से अपनी स्थिति मजबूत कर सकते हैं।