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ULIPs: टैक्स बचत के लोकप्रिय यूलिप पर लगी लगाम, अब 2.5 लाख से ऊपर नहीं टैक्स फ्री फायदा

Mon, 03 Nov 2025 06:55 AM IST
शुभम कुमार बिजनेस डेस्क, अमर उजाला

सार

कभी टैक्स बचत और बीमा कवरेज का आदर्श साधन रहे यूलिप अब पहले जैसे फायदेमंद नहीं रहे। नए नियमों के तहत केवल 2.5 लाख रुपये तक के कुल वार्षिक प्रीमियम पर ही मैच्योरिटी आय टैक्स फ्री रहेगी। इससे ऊपर की आय पर 12.5% लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगेगा। यह बदलाव हाई-इनकम निवेशकों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

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यूलिप टैक्स - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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लंबे वक्त से, यूलिप टैक्स बचाने का लोकप्रिय विकल्प था, खासतौर पर बीमा कंपनियों के लिए यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (ULIPs) एक आदर्श वित्तीय उत्पाद था। इसमें बीमा का कवरेज, बाजार से जुड़ा (मार्केट लिंक्ड)  रिटर्न और आयकर मुक्त मैच्योरिटी बेनिफिट मिलता था। टैक्स कानून में हुए हालिया बदलावों ने तस्वीर उलट दी। यूलिप अब पहले जितना फायदेमंद नहीं रहा, खासकर ऊंचे प्रीमियम वालों के लिए।
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क्या हैं बदलाव
आयकर कानून की धारा 80सी के तहत, अब केवल 1.5 लाख रुपये तक का यूलिप प्रीमियम टैक्स छूट के लिए पात्र है, लेकिन इसके लिए शर्त है। वार्षिक प्रीमियम कुल बीमा राशि के 10 फीसदी से अधिक नहीं होना चाहिए व पॉलिसी को कम से कम पांच साल तक बनाए रखना होगा।  बजट-2021 में यूलिप की एक और रियायत घटाई गई थी, जिसका स्पष्टीकरण 2025 में दिया गया है। यूलिप की मैच्योरिटी पर होने वाली आय अब पूरी तरह से टैक्स फ्री नहीं है। वार्षिक प्रीमियम 2.5 लाख रुपये तक होने पर ही लाभ मिलेगा।

2.5 लाख रुपये की सीमा प्रति पॉलिसी नहीं, बल्कि सभी यूलिप पॉलिसियों के कुल प्रीमियम पर लागू है। वार्षिक प्रीमियम 2.5 लाख रुपये से ज्यादा होने पर, म्यूचुअल फंड की तरह टैक्स लगेगा यानी यूलिप से होने वाले लाभ पर 12.5 फीसदी का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) लागू होगा। अति-धनाढ्य (HNI) बीमा की आड़ में टैक्स-फ्री इक्विटी निवेश का फायदा उठाते थे। 2021 से पहले, यूलिप की मैच्योरिटी से आय टैक्स फ्री थी।
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यूलिप क्यों नहीं रहा फायदेमंद?
  • शुरुआती वर्षों में कम रिटर्न, क्योंकि प्रीमियम का बड़ा हिस्सा कंपनी की फीस में जाता है। पांच साल की लॉक-इन अवधि के दौरान पैसा नहीं निकाल सकते।
  • ज्यादा फीस के कारण, यूलिप का शुद्ध रिटर्न अक्सर डायरेक्ट म्यूचुअल फंड की तुलना में कम हो सकता है।
  • मृत्यु लाभ में बदलाव नहीं...यूलिप में एक क्षेत्र ऐसा है, जो बदलाव से अछूता है। वह है मृत्यु लाभ। बीमाधारक की मृत्यु पर नॉमिनी को मिलने वाली राशि इनकम टैक्स की धारा 10 (10डी) के तहत टैक्स फ्री है।
बीमा और निवेश को अलग-अलग रखें
यूलिप तभी चुनें, जब बीमा और जबरन बचत आपकी प्राथमिकता हो। टर्म इंश्योरेंस खरीदकर पर्याप्त जीवन बीमा कवर ले सकते हैं। वेल्थ क्रिएशन के लिए म्यूचुअल फंड्स अच्छे विकल्प हो सकते हैं। सभी एसेट क्लास में टैक्स के बाद रिटर्न की तुलना करके निवेश का फैसला लें।- गौरी चड्ढा, टैक्स एक्सपर्ट

तारीख पता है?
  • 06 नवंबर : Orkla India (1167.54 करोड़ रुपये)
  • 07 नवंबर : Studds Accessories Ltd (455.49 करोड़ रुपये) 
  • 10 नवंबर : Lenskart Solutions Pvt Ltd (7278.02 करोड़ रुपये) 

कंपनियों के तिमाही नतीजे/घोषणा
  • 03 नवंबर : भारती एयरटेल, पावर ग्रिड, कल्याणी स्टील लि., टाइटन कंपनी, अंबुजा सीमेंट 
  • 04 नवंबर : एसबीआई, एमएंडएम, पेटीएम, गार्डन रीच, चंबल फर्टिलाइजर, मैनकाइंड फार्मा  
  • 05 नवंबर : सनफार्मा, अदाणी पोर्ट्स, टाटा स्टील, ऑयल इंडिया, मदरसन सूमी वायरिंग, जमना ऑटो 
  • 06 नवंबर : विनिर्माण और सेवा पीएमआई (अक्तूबर) 
डिस्क्लेमर: अपना पैसा में छपे विचार, राय और निवेश संबंधी सुझाव अलग-अलग विशेषज्ञों, ब्रोकर फर्मों या रिसर्च संस्थानों के हैं। इनसे अखबार या उसके प्रबंधन की सहमति जरूरी नहीं है। कृपया किसी भी तरह का निवेश फैसला लेने से पहले अपने पंजीकृत वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें। इस जानकारी के आधार पर होने वाले किसी भी नुकसान की जिम्मेदारी अखबार या उसके प्रबंधन की नहीं होगी।
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