चीन के साथ चल रहे सीमा विवाद को लेकर भारत अपना रुख कड़ा कर रहा है। 59 चाइनीज एप्स पर बैन लगाने के बाद अब चीनी कंपनियों को बड़े प्रोजेक्ट से दूर करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक, इस योजना पर जल्द से जल्द काम शुरू हो, इसके लिए ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपर की मदद ली जाएगी।
योजना की अवधारणा पर 44.8 बिलियन डॉलर, इसे लागू करने पर 58.6 बिलियन डॉलर और विकसित फेज के लिए 36.5 बिलियन डॉलर का बजट बनाया गया है।
इसमें सड़क, अर्बन हाउसिंग, रेलवे, सिंचाई और पावर प्रोजेक्ट (पारंपरिक व गैर पारंपरिक) शामिल हैं। इन सब पर उक्त योजना के लिए तय बजट का 80 फीसदी हिस्सा खर्च होगा।
सड़क के लिए जो भी प्रोजेक्ट तैयार होंगे, उसमें चीनी कंपनियों को शामिल नहीं किया जाएगा। करीब चार माह पहले जब इस प्लान की डमी तैयार की गई, तो उसमें चीन की कई नामी डेवलपर कंपनियां आगे थी।
अब उन सभी कंपनियों को हटा दिया गया है। योजना में करीब 1.99 लाख किलोमीटर लंबे हाईवे बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें प्राइवेट कंपनियों का 39 फीसदी हिस्सा रहेगा।
प्रोजेक्ट पर कुल 26.9 बिलियन डॉलर राशि खर्च होगी।
इसके लिए अब इस प्रोजेक्ट में जर्मन, दुबई, जापान, सिंगापुर और दूसरे राष्ट्रों की कंपनियों को प्राइवेट पार्टनर के तौर पर शामिल किया जा सकता है।
इस योजना में रेल और मेट्रो के लिए भारी-भरकम राशि निर्धारित की गई है। 25 से ज्यादा शहरों में मेट्रो रेल चलेगी। इस प्रोजेक्ट पर 22.37 बिलियन डॉलर की राशि खर्च होगी।
इसमें भी केंद्र और राज्यों के अलावा प्राइवेट पार्टनर शामिल होंगे। रेलवे की तरफ से 500 पैसेंजर ट्रेन प्राइवेट सेक्टर को सौंपी जाएंगी। साथ ही 225 स्टेशन भी प्राइवेट हाथों में जाएंगे।
एनर्जी सेक्टर में नवीनीकरणीय उर्जा पर खास जोर दिया जाएगा। इसका ग्राफ 9 से बढ़ाकर 19 फीसदी होगा। दिबांग हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट और एचवीडीसी बाइपोल लिंक प्रोजेक्ट (ट्रांसमिशन) पर विदेशी कंपनियों के साथ मिलकर काम शुरू होगा।
सिंचाई क्षेत्र का दायरा 68 मिलियन हेक्टेयर से बढ़ाकर 85 मिलियन हेक्टेयर किया जाएगा। इस योजना पर 10.5 बिलियन डॉलर खर्च होंगे। नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में 71 फीसदी काम डिजिटल रहेगा और इसकी 71 फीसदी जिम्मेदारी प्राइवेट सेक्टर को मिलेगी।
एयरपोर्ट और सड़कों के प्रोजेक्ट में 39-39 फीसदी साझेदारी प्राइवेट वेंडर की रहेगी। इन सभी योजनाओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट यानी भारतीय अर्थव्यवस्था को पांच ट्रिलियन डॉलर की इकोनामी के स्तर तक ले जाना, के साथ अटैच किया गया है।