भारत के सेवा क्षेत्र की गतिविधियों में अक्तूबर में लगातार दूसरे महीने सुस्ती दर्ज की गई। इसे कारोबार के प्रति आशावाद के तीन साल के निचले स्तर पर पहुंचने से झटका लगा है। मंगलवार को एक निजी सर्वे से यह जानकारी सामने आई है। पीएमआई सूचकांक के कम रहने से माना जाता है कि आगामी महीनों में भी जीडीपी में सुस्ती जारी रहेगी।
निक्की आईएचएस मार्किट सर्विसेस परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) अक्तूबर में बढ़कर 49.2 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि सितंबर में यह 48.7 रहा था। पीएमआई सूचकांक के 50 से नीचे रहने का मतलब सुस्ती और इससे ऊपर के आंकड़े को बढ़ोतरी के तौर पर देखा जाता है।
इससे पहले अगस्त, 2017 में लगातार दूसरे महीने में सेवा गतिविधियों में कमी दर्ज की गई। उस दौरान वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लागू हुए एक महीना ही हुआ था। मांग पर नजर रखने वाले उप सूचकांक से पिछले महीने नए कारोबार में बढ़ोतरी के संकेत मिले।
निवेश और नौकरियों पर दिख सकता है असर
विनिर्माण में सुस्ती से कम्पोजिट सूचकांक 49.6 रह गया, जो दो साल से ज्यादा समय का निचला स्तर है। इससे एशिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था में कमजोरी जारी रहने के संकेत मिले हैं। आईएचएस मार्किट की प्रमुख अर्थशास्त्री पॉलियाना डि लीमा ने कहा, ‘भारत के सेवा क्षेत्र में सुस्ती खासी चिंताजनक है, क्योंकि कारोबारी गतिविधियों में लगातार सुस्ती बनी हुई है।’
उन्होंने कहा, ‘इससे भी बड़ी चिंता की बात यह है कि भविष्य में और गिरावट के अनुमान हैं, क्योंकि कारोबारी आत्म-विश्वास में कमी का असर आगे निवेश और नौकरियों पर भी दिखेगा।’