प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में सरकार की ओर से चलने वाली मुफ्त राशन स्कीम को दिसंबर महीने तक के लिए बढ़ा दिया गया है। कैबिनेट की ओर से मंजूरी मिलने के बाद अब गरीबों को त्याेहारों के दौरान मुफ्त राशन मिलने का रास्ता साफ हो गया है। केंद्र के इस निर्णय से देश के करीब 80 करोड़ लोगों को राहत मिलेगी। बता दें कि इस स्कीम की शुरुआत कोरोना काल शुरू होने के समय मार्च 2020 में की गई थी।
आइए जानते हैं सरकार ने मुफ्त राशन स्कीम को अवधि देने का फैसला क्यों लिया? अब तक स्कीम पर कितने पैसे खर्च हो चुके हैं? दिसंबर तक योजना को अविधि विस्तार मिलने से खजाने कितने रुपये का अतरिक्त भार पड़ेगा?
सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार इस स्कीम को और तीन महीने का अवधि विस्तार देने से खजाने पर 44,762 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ेगा। इस स्कीम के तहत एनएफएसए के अंतर्गत आने वाले लाभुकों को हर महीने पांच किलोग्राम मुफ्त अनाज उपलब्ध कराया जाता है। पीएमजीकेएवाई योजना के तहत अब तक सरकार 1,003 मीट्रिक टन खाद्यान्न का वितरण कर चुकी है।
कोरोना काल में शुरू हुए इस स्कीम के कार्यान्वयन पर सरकार अब तक के छह फेज में सब्सिडी के रूप में 3.45 लाख रुपये खर्च कर चुकी है। अब सातवें फेज के लिए इस योजना को अवधि विस्तार देने से इस योजना पर कुल 3.91 लाख करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
अब तक छह चरणों में गरीबों को किया गया है मुफ्त खाद्यान्न का वितरण
पीएमजीकेएवाई का पहला चरण और दूसरा चरण आठ महीनों का था। यह चरण अप्रैल 2020 से नवंबर 2020 तक चला था। इस योजना के तीसरे और पांचवें चरण का कार्यान्वयन 11 महीनों तक मई 2021 से मार्च 2022 के बीच किया गया।
पीएमजीकेएवाई के छठे चरण का कार्यान्वयन छह महीने तक अप्रेल 2022 से सितंबर 2022 के बीच किया जा रहा है। वहीं इस योजना के सातवें चरण का कार्यान्वयन अक्तूबर 2022 से दिसंबर 2022 के बीच तीन महीनों के लिए किया जाएगा।
सरकार का तर्क- फैसले से त्योहारों के दौरान गरीबों को मिलेगी मदद