केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को साफ किया कि भारत रीजनल कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप (आरसीईपी) में शामिल होने नहीं जा रहा है। उन्होंने कहा कि देशहित को ध्यान में रखते हुए भारत दो साल पहले ही खुद को इससे अलग कर चुका है।
भारत 2019 में हो गया था अलग
गौरतलब है कि भारत 2012 में आरसीईपी में शामिल होने के लिए ग्रुप के देशों के साथ आया था, लेकिन 2019 में जब इसमें शामिल देशों ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए थे तो भारत ने खुद को अगल कर लिया था। बता दें कि इस ग्रुप में चीन, जापान, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड जैसे देश शामिल हैं।
स्टार्टअप के क्षेत्र में भारत आगे
इस बीच यूएई-इंडिया स्टार्टअप फोरम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि स्टार्टअप के क्षेत्र में भारत तेज प्रगति कर रहा है। देश में अभी 92 यूनिकॉर्न है जिनका बाजार पूंजीकरण एक अरब डॉलर से अधिक है। दुनिया में भारत तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है।
एक मई से लागू हो सकता है एफटीए
इससे पहले रविवार को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा था कि भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) इस वर्ष एक मई से लागू हो सकता है। इस समझौते के तहत कपड़ा, कृषि, सूखे मेवे, रत्न और आभूषण जैसे क्षेत्रों के 6,090 सामानों के घरेलू निर्यातकों को यूएई के बाजार में शुल्क मुक्त पहुंच मिलेगी।