भारत से यूरोपीय संघ को डीजल जैसे ईंधनों का निर्यात चालू वित्त वर्ष की तीन तिमाहियों में सालाना आधार पर 58 प्रतिशत बढ़ गया है। इसमें रूस से आने वाले कच्चे तेल की बड़ी हिस्सेदारी है, जिसे रिफाइंड करके यूरोप भेजा जा रहा है। यह निर्यात जामनगर, वडिनार (गुजरात) और मैंगलोर रिफाइनरी से हो रहा है।
दिसंबर 2022 में यूरोपीय संघ और जी7 देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगाते हुए उसके कच्चे तेल के आयात पर मूल्य सीमा और प्रतिबंध लगा दिया था। हालांकि, नियमों में स्पष्टता नहीं होने से यह माना गया था कि प्रतिबंध नहीं लगाने वाले देश रूसी कच्चे तेल का आयात कर सकते हैं और उन्हें रिफाइंडउत्पादों में बदलकर प्रतिबंध लगाने वाले देशों को निर्यात कर सकते हैं।
सीआरईए ने दी जानकारी
ऊर्जा और स्वच्छ वायु पर शोध केंद्र (सीआरईए) के मुताबिक रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भारत रूसी कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बन गया है। युद्ध से पहले देश का रूस से आयात कुल आयातित तेल के एक प्रतिशत से भी कम था। युद्ध के बाद खरीद बढ़कर लगभग 40 प्रतिशत हो गई है।
31 अरब डॉलर का हो सकता है रसायन निर्यात
भारत चालू वित्त वर्ष में 31 अरब डॉलर के केमिकल निर्यात लक्ष्य को हासिल कर सकता है। पिछले साल यह 30 अरब डॉलर था। केमेक्सिल का मानना है कि ब्राजील, अमेरिका, जापान और सऊदी अरब जैसे देशों में भारत में निर्मित केमिकल की अच्छी मांग है। केमेक्सिल के महानिदेशक रघुवीर किनी ने कहा कि अप्रैल-सितंबर के दौरान केमिकल का कुल निर्यात 4.57 प्रतिशत बढ़कर 14.1 अरब डॉलर हो गया। पिछले साल ब्राजील में सूखे के कारण निर्यात कम हो गया था। लेकिन इस साल स्थिति अच्छी है। हमें वृद्धि की उम्मीद है। बता दें कि भारत ब्राजील को सालाना एक अरब डॉलर का केमिकल निर्यात करता है।
भारत में जेट ईंधन का आयात हुआ दोगुना
रिपोर्ट में कहा गया है कि यूक्रेन पर रूस के आक्रमण से पहले यूरोप आमतौर पर भारत से औसतन 1,54,000 बैरल प्रति दिन (बीपीडी) डीजल और जेट ईंधन आयात करता था। अब यह लगभग दोगुना हो गया है। दिसंबर, 2022 में तेल मूल्य सीमा लागू होने के बाद से 13 महीनों में स्वीकृत देशों को भारत के तेल उत्पादों के निर्यात का एक तिहाई से अधिक हिस्सा रूसी कच्चे तेल से प्राप्त हुआ था। भारत ने अक्तूबर में रूस से दो अरब यूरो मूल्य का कच्चा तेल खरीदा, जो सितंबर के 2.4 अरब यूरो से कम है।