कमजोर और देर से आए मानसून के कारण जुलाई में किसानों ने सिंचाई के लिए डीजल पंपों का अधिक इस्तेमाल किया, जिससे पेट्रोल और डीजल की बिक्री में क्रमशः 9.7% और 10.7% की बढ़ोतरी हुई। वहीं, औद्योगिक व व्यावसायिक उपभोक्ताओं के पीएनजी अपनाने से एलपीजी की बिक्री में गिरावट जारी रही।
जुलाई महीने में देश की तीन सरकारी तेल कंपनियों; इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (एचपीसीएल); की पेट्रोल और डीजल की बिक्री में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसकी मुख्य वजह सामान्य से कमजोर मानसून रही, जिसके कारण किसानों को सिंचाई के लिए डीजल पंप अधिक चलाने पड़े। वहीं, रसोई गैस (एलपीजी) की बिक्री में गिरावट जारी रही, क्योंकि कई औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ता अब पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) का इस्तेमाल करने लगे हैं।
पेट्रोल की बिक्री में करीब 10 फीसदी बढ़ोतरी
प्रारंभिक उद्योग आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 में पेट्रोल की बिक्री 9.7 फीसदी बढ़कर 34.5 लाख टन रही, जबकि जुलाई 2025 में यह 31.4 लाख टन थी।
जुलाई 2024 की तुलना में बिक्री 15.1 फीसदी अधिक रही।
जुलाई 2023 के मुकाबले इसमें 36.1 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
हालांकि जून 2026 के मुकाबले जुलाई में बिक्री 1.1 फीसदी कम रही। जून में 34.8 लाख टन पेट्रोल बिका था।
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डीजल की मांग भी बढ़ी
देश में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाले ईंधन डीजल की बिक्री जुलाई में 10.7 फीसदी बढ़कर 71.2 लाख टन पहुंच गई। पिछले साल इसी महीने यह 64.3 लाख टन थी। डीजल का उपयोग मुख्य रूप से माल ढुलाई, कृषि मशीनों और सिंचाई पंपों में होता है। इस बार मानसून की बारिश देर से और सामान्य से कम होने के कारण किसानों को खेतों की सिंचाई के लिए डीजल पंप ज्यादा चलाने पड़े, जिससे इसकी मांग बढ़ गई।
जुलाई 2024 की तुलना में बिक्री 11.5 फीसदी अधिक रही।
जुलाई 2023 के मुकाबले इसमें 12.7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
हालांकि जून के मुकाबले जुलाई में डीजल की बिक्री 9.2 फीसदी घट गई।
मानसून की वजह से बदला ट्रेंड
आमतौर पर मानसून शुरू होने के बाद डीजल और पेट्रोल की मांग कम हो जाती है, क्योंकि सिंचाई के लिए पंप कम चलाए जाते हैं और बारिश के कारण वाहनों की आवाजाही भी घटती है। लेकिन इस साल मानसून कमजोर और देर से आने के कारण किसानों ने सिंचाई के लिए डीजल का अधिक इस्तेमाल किया, जिससे बिक्री बढ़ी। वहीं, जून के मुकाबले जुलाई में बिक्री कम रहने की एक वजह यह भी रही कि जून में स्कूल-कॉलेज की छुट्टियों के दौरान पर्यटन और यात्रा बढ़ने से ईंधन की मांग अधिक रहती है।
विमान ईंधन की बिक्री में भी बढ़ोतरी
जुलाई में विमान ईंधन (एटीएफ) की बिक्री 2.9 फीसदी बढ़कर 6.59 लाख टन रही।
यह जुलाई 2025 के मुकाबले 2.3 फीसदी अधिक रही।
जुलाई 2023 की तुलना में इसमें 16.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
हालांकि जून के मुकाबले एटीएफ की बिक्री 4.6 फीसदी कम रही।
एलपीजी की बिक्री में लगातार गिरावट
जुलाई में एलपीजी की बिक्री 17.4 फीसदी घटकर 23.7 लाख टन रह गई। उद्योग अधिकारियों के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट के दौरान एलपीजी आपूर्ति प्रभावित होने से कई उद्योगों और होटलों ने पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) का उपयोग शुरू कर दिया था। अब आपूर्ति सामान्य होने के बावजूद कई उपभोक्ता एलपीजी की जगह पीएनजी का ही इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे एलपीजी की मांग पहले जैसी नहीं लौट पाई है।
जुलाई 2025 की तुलना में एलपीजी की खपत 13.3 फीसदी कम रही।
जुलाई 2023 के मुकाबले इसमें 1.1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
जून में एलपीजी की बिक्री में कुछ सुधार हुआ था और यह 21.8 लाख टन रही थी, लेकिन साल-दर-साल आधार पर गिरावट बनी हुई है।