सरकार ने नवंबर, 2014 और जनवरी, 2016 के बीच नौ बार उत्पाद शुल्क बढ़ाया है, जबकि एक बार 2 रुपये प्रति लीटर कमी की गई। नौ बार में पेट्रोल पर 11.77 रुपये और डीजल पर 13.47 रुपये प्रति लीटर उत्पाद शुल्क बढ़ाने से सरकार को 2.42 लाख करोड़ रुपये की कमाई हुई। इस दौरान सरकार ने सभी राज्यों से वैट कम करने को कहा, लेकिन महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश ने ही कमी की।
कैसे घटेंगी कीमतें
केंद्र व राज्य सरकारों को पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर अंकुश के लिए एक साथ कई कदम उठाने होंगे। केंद्र को जहां उत्पाद शुल्क में कटौती करनी होगी, वहीं राज्यों को वैट घटाना होगा। पेट्रोल-डीजल को जीएसटी में लाने का लाभ सिर्फ उन्हीं राज्यों को मिलेगा, जहां वैट की दर काफी ज्यादा है। जिन राज्यों में वैट 20 फीसदी के आसपास है, वहां जीएसटी की उच्चतम दर 28 फीसदी लागू करने से नुकसान होगा।