घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल के दाम आसमान में भले ही पहुंच गए हों, लेकिन इसके लिए कच्चे तेल की बढ़ी कीमत उतना जिम्मेदार नहीं है, जितना कि केन्द्र और राज्य सरकारें। केन्द्र अभी भी इन दोंनों ईंधन पर प्रति लीटर करीब 20 और 15 रुपये की कर वसूली कर रही है जबकि राज्य सरकारें करीब 40 फीसदी तक वैल्यू एडेड टैक्स -वैट- वसूलती हैं। सिर्फ मोदी सरकार की ही बात करें तो इसने पिछले नवंबर 2014 से जनवरी 2016 के बीच दोनों ईंधन पर नौ बार केन्द्रीय उत्पाद शुल्क में बढ़ोतरी की है।
देश के प्रमुख तेल विपणन कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी पेट्रोल-डीजल के दाम में इतनी तेज बढ़ोतरी क्यों हो रही है के सवाल पर कहते हैं यह बाजार का असर है। हालांकि उनका कहना है कि पेट्रोल-डीजल के आसमान में पहुंची कीमत के लिए कच्चे तेल की कीमत उतना जिम्मेदार नहीं है, जितना कि केन्द्र एवं राज्यों का कर।
कच्चा तेल तो अभी महज 80 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा है जबकि मार्च 2012 में तो 127 डॉलर प्रति बैरल तक क्रूड खरीदना पड़ा था। उस समय दिल्ली में पेट्रोल 65.64 रुपये और डीजल 40.91 रुपये प्रति लीटर बिक रहा था। अभी कच्चा तेल 80 डॉलर पर है लेकिन 23 मई को दिल्ली में पेट्रोल 77.17 रुपये जबकि डीजल 68.34 रुपये प्रति लीटर है।
अभी पेट्रोल पर 19.48 रुपये जबकि डीजल पर 15.33 रुपये का है केन्द्रीय कर
पेट्रोलियम मंत्रालय के तहत काम करने वाले पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल -पीपीएसी- के मुताबिक इस समय पेट्रोल पर प्रति लीटर बेसिक एक्साइज ड्यूटी के रूप् में 4.48 रुपये, एडिशनल एक्साइज ड्यूटी के रूप में 7.00 रुपये और रोड-इंफ्रा सेस के रूप में 8.00 रुपये वसूले जाते हैं।
मतलब कुल मिला कर 19.48 रुपये का केन्द्रीय उत्पाद शुल्क। इसी तरह डीजल पर प्रति लीटर 6.33 रुपये की बेसिक एक्साइज ड्यूटी, एक रुपया एडिशनल एक्साइज ड्यूटी और 8.00 रुपये रोड एवं इंफ्रा सेस देय होता है। मतलब ग्राहकों को कुल मिला कर 15.33 रुपये का केन्द्रीय उत्पाद शुल्क डीजल पर देना पड़ता है।