भारत में व्यक्तिगत उधराकर्ताओं का औसत ऋण बोझ बीते दो वर्षों में तेजी से बढ़ा है। भारतीय रिजर्व बैंक की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2023 में जहां प्रति व्यक्ति औसत ऋण 3.9 रुपये लाख था, वो मार्च 2025 तक बढ़कर 4.8 लाख रुपये पर पहुंच गया है।
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प्रति व्यक्ति ऋण कैसे निकाले?
प्रति व्यक्ति ऋण, सरकार के कुल ऋण का एक माप है, जो यह दर्शाता है कि प्रत्येक नागरिक पर कितना कर्ज बकाया है।
प्रति व्यक्ति ऋण = कुल ऋण / जनसंख्या
होम लोन में पुराने उधारकर्ताओं की हिस्सेदारी अधिक
ऋण स्तर में यह वृद्धि मुख्य रूप से उच्च रेटिंग वाले उधारकर्ताओं के कारण हुई है। साथ ही, आवास ऋण में तेजी से इजाफा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, कुल घरेलू ऋण का लगभग 29% हिस्सा गृह ऋण (होम लोन) से जुड़ा है। हालांकि, आवास ऋणों में वृद्धि समग्र रूप से स्थिर बनी हुई है। दिलचस्प बात यह है कि नई लोन लेने वालों की तुलना में पुराने उधारकर्ता औसतन एक-तिहाई अधिक राशि का ऋण ले रहे हैं। हाल के वर्षों में भारत का घरेलू ऋण लगातार बढ़ रहा है। इसका मुख्य कारण वित्तीय क्षेत्र से उधारी में वृद्धि है।
एलटीवी अनुपात और डिफॉल्ट की आशंका
रिपोर्ट में लोन-टू-वैल्यू (एलटीवी) अनुपात का बढ़ना वित्तीय स्थिरता के लिए चिंता का विषय बन सकता है। 70 प्रतिशत से अधिक एलटीवी अनुपात वाले उधारकर्ता खातों की हिस्सदारी बढ़ रही है। इसके अलावा निम्न-रेटेड और अधिक ऋणग्रस्त उधारकर्ताओं के बीच जोखिम की स्थिति बनी हुई है। हालांकि, कोविड-19 महामारी के दौरान की अवधि की तुलना में इन स्तरों में काफी गिरावट आई है।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों की तुलना में कम है घरेलू ऋण स्तर
हालांकि दिसंबर 2024 के अंत तक, घरेलू ऋण वर्तमान बाजार मूल्यों पर जीडीपी का 41.9 प्रतिशत था। यह अन्य उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाओं (ईएमआई) की तुलना में अभी भी अपेक्षाकृत कम है।
गैर-आवसीय ऋण है सबसे अधिक
घरेलू ऋण की व्यापक श्रेणियों में गैर-आवसीय ऋण सबसे अधिक है। यह ऋण मुख्य रूप से उपभोग उद्देश्यों के लिए उपयोग किए जाते हैं। यह मार्च 2025 तक कुल घरेलू ऋण का 54.9 प्रतिशत हिस्सा था। गैर-आवासीय ऋण, जिसे संपत्ति पर ऋण भी कहा जाता है, एक प्रकार का ऋण है जो गैर-आवासीय संपत्ति (जैसे, वाणिज्यिक संपत्ति, कार्यालय स्थान, या औद्योगिक परिसर) को गिरवी रखकर लिया जाता है।
रिजर्व बैंक ने दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए उधारकर्ताओं की प्रोफाइल, ऋण प्रवृत्तियों और ऋण देने के पैटर्न में बदलाव की निगरानी के महत्व पर जोर दिया है।