22 अप्रैल को पहलगाम हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था। इसके जवाब में पाकिस्तान ने सभी भारतीय विमानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध लगा दिया था। मगर यह प्रतिबंध पाकिस्तान पर ही उल्टा पड़ गया।
आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को भारत को आंखें दिखाना महंगा पड़ रहा है। कर्ज के बोझ तले दबा पाकिस्तान एक गलती की वजह से अपना बड़ा नुकसान करा चुका है। भारतीय विमानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध लगाकर पाकिस्तान को दो महीने में 1240 करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ा है। पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में रक्षा मंत्रालय ने बताया कि हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध से यातायात में 20 प्रतिशत कमी आई।
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22 अप्रैल को पहलगाम हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था। इसके जवाब में पाकिस्तान ने सभी भारतीय विमानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध लगा दिया था। मगर यह प्रतिबंध पाकिस्तान पर ही उल्टा पड़ गया। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक 24 अप्रैल से 30 जून के बीच हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध से पाकिस्तान हवाई अड्डा प्राधिकरण (पीएए) का हवाई उड़ान शुल्क राजस्व गिर गया। वहीं रोज लगभग 100-150 भारतीय विमान प्रभावित हुए। जबकि पाकिस्तान के पारगमन हवाई यातायात में लगभग 20 प्रतिशत की कमी आई।
पाकिस्तानी रक्षा मंत्रालय ने नुकसान की बात स्वीकार की, लेकिन यह कहकर उसे उचित ठहराने की कोशिश की कि संप्रभुता और राष्ट्रीय रक्षा आर्थिक पहलुओं से ऊपर हैं। अधिकारियों ने यह भी दावा किया कि ऐसे उपाय रणनीतिक और कूटनीतिक कारणों से नोटिस टू एयरमैन (NOTAMs) के जरिए जारी किए गए थे। आंकड़ों के मुताबिक 2019 में पीएए का औसत दैनिक ओवरफ्लाइट राजस्व 508,000 डॉलर था, जबकि 2025 में यह 760,000 डॉलर था, जिसका अर्थ है कि प्रतिबंध से पाकिस्तान को काफी नुकसान हुआ है।
मौजूदा समय में पाकिस्तान का हवाई क्षेत्र भारतीय एयरलाइनों और विमानों को छोड़कर सभी के लिए खुला है। इस प्रतिबंध को दो बार बढ़ाया गया है और अब यह अगस्त के अंतिम सप्ताह तक जारी रहेगा। भारतीय एयरलाइन्स कंपनियां अन्य अंतर्राष्ट्रीय मार्गों पर अप्रभावित हैं। जबकि पाकिस्तानी एयरलाइन्स को अभी भी भारतीय वायुक्षेत्र में प्रवेश करने से रोक दिया गया है।