पड़ोसी देश पाकिस्तान भीषण बाढ़ के बाद आई परेशानियों से जूझ रहा है। भारत बाढ़ग्रस्त पाकिस्तान को राहत सामग्री भेजने के लिए पूरी तरह तैयार है और उसे पाकिस्तान से हरी झंडी मिलने का इंतजार है। लेकिन राहत सामग्री के वितरण से जुड़े कई अधिकारियों और सूत्रों का कहना है, राहत सामग्री मुहैया कराने के मामले पर दोनों देशों की बातचीत ठंडे बस्ते में चली गई है। पाकिस्तान ने भारत से प्रस्तावित मदद के बारे में कोई बातचीत नहीं की है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान में आई विनाशकारी बाढ़ से जान-माल के नुकसान पर चिंता जताई थी। इसके जवाब में शरीफ ने ट्वीट किया था। इसके बाद पाकिस्तान के वित्त मंत्री मिफ्ताह इस्माइल ने भारत से खाद्यान्न के आयात के सुझाव पर गैर दोस्ताना रुख अपनाते हुए इसे नकार सा दिया है। बताया जाता है कि उन्होंने द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों की बहाली को कश्मीर मुद्दे से जोड़ दिया है। इस मामले को और जटिल करते हुए शरीफ ने कहा कि अभी भारत से सामान्य व्यापारिक संबंध शुरू नहीं हो पाएंगे। साल 2016 के उरी हमले के बाद दोनों देशों के बीच छिटपुट व्यापार हो रहा है।
पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर की स्थिति में बदलाव और अनुच्छेद 370 निरस्त किए जाने के बाद भारत के साथ सभी तरह के व्यापार को प्रतिबंधित कर दिया है। किसी भी आयात को कानूनी रूप से करने के लिए हालिया प्रतिबंधों को हटाना पड़ेगा। पाकिस्तान ने ईरान और अफगानिस्तान से प्याज और टमाटर का आयात शुरू कर दिया है। हालांकि पाकिस्तान के इन दोनों देशों से संबंध भी तनावग्रस्त हैं।
| वर्ष | निर्यात | वृद्धि % | आयात | वृद्धि% |
| 2022-23 | 204.83 | 72.78 | 17.67 | 5167.66 |
| 2021-22 | 118.55 | 133.46 | 0.34 | -22.48 |
| 2020-21 | 50.78 | -88.77 | 0.43 | 93.95 |
| 2019-20 | 452 | -20.55 | 7.13 | 93.33 |
स्रोत: वाणिज्य विभाग
उद्योग एवं वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के शुरुआती तीन महीनों के दौरान पाकिस्तान ने भारत से 20.48 करोड़ डॉलर की वस्तुओं का आयात किया, जो पिछले वर्ष से 73 फीसदी अधिक था। इस आयत में चीनी तथा औषधीय उत्पाद अहम थे। इनके अलावा पाकिस्तान ने चाय, मसाले, फल-सब्जियों और कपड़ों का आयात किया। अप्रैल से जून तिमाही के दौरान भारत ने पाकिस्तान से 1.7 करोड़ डॉलर का मामूली आयात किया। वित्त वर्ष 2019 में दोनों देशों के बीच 2.6 अरब डॉलर मूल्य का व्यापार हुआ था, जो वित्त वर्ष 20,21 और 22 में घटकर क्रमश 83.1 करोड़ डॉलर, 32.9 करोड़ डॉलर तथा 51.6 करोड़ डॉलर रहा।