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10 लाख लोग इस साल बेरोजगार होंगे पाक में, सेना के कब्जे में एक-तिहाई अर्थव्यवस्था

Thu, 11 Apr 2019 03:26 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
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पाक सेना (फाइल फोटो)
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पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का हाल दिनोंदिन बदतर होता जा रहा है। एक अनुमान है कि महंगाई बढ़ने के चलते पाकिस्तान में इस बार 10 लाख से अधिक लोग बेरोजगार हो जाएंगे। वहां की एक तिहाई अर्थव्यवस्था पर सेना का कब्जा है। सेना के आगे वहां की निर्वाचित सरकार भी बेबस है । ऐसे में  इसका असर भारत पर भी पड़ेगा, क्योंकि पाक सेना के लिए भारत विरोध एक व्यापार की तरह है, जिसकी आढ़ में वो हर गलत-सही धंधा करती है। 

इस संस्था के नियंत्रण में व्यापार

डॉन अखबार के मुताबिक पाकिस्तान में फौजी फाउंडेशन के पास ज्यादातर बिजनेस हैं। फौजी फाउंडेशन के पास सीमेंट, फर्टिलाइजर, बिजली और खाद्य उत्पादन करने वाली फैक्ट्रियों का नियंत्रण हैं।  इसके अलावा 15 प्रोजेक्ट का भी इसके पास नियंत्रण है। 

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फौजी के अलावा देश में शाहीन फाउंडेशन, बहरिया फाउंडेशन, आर्मी वेलफेयर ट्रस्ट और डिफेंस हाउसिंग अथॉरिटी (डीएचए) है, जिसके तहत 50 से अधिक व्यापार पर पूरा कंट्रोल है। डीएचए को कानून के जरिए बनाया गया है, जिसके कार्य का क्षेत्र कराची, लाहौर, रावलपिंडी, इस्लामाबाद, मुल्तान, गुंजरावाला, बाहवलपुर, पेशावर और क्वेटा में है।  

पाक सेना के लिए भारत विरोध है अच्छा बिजनेस

पाक सेना के काफी ज्यादा संख्या में बेनामी संपत्ति और विदेशी खाते हैं। पाक सेना के लिए भारत का विरोध करना एक तरह का बिजनेस है। वो एक तरफ बातचीत करती है तो दूसरी तरफ आतंकवाद को बढ़ावा देना रहता है। अगर कश्मीर समस्या का समाधान हो गया तो पाकिस्तान में सेना का नियंत्रण पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा। इससे फौजी फाउंडेशन के बिजनेस पर भी असर पड़ेगा। 

अर्थव्यवस्था से नहीं है लेना-देना

पाकिस्तानी सेना को देश की अर्थव्यवस्था और वहां के नागरिकों की दयनीय हालत से किसी तरह का कोई फर्क नहीं पड़ता है। वो चाहता है कि प्रत्येक पाकिस्तानी रुपये को केवल भारत विरोध में लगाया जाए, ताकि उसका बरसों पुराना एजेंडा चलता रहे। 

पाकिस्तान अब सार्क देशों में सबसे फिसड्डी हो गया है। रोजाना महंगाई से जहां देश की जनता बिलख रही है, वहीं दूसरी तरफ इमरान खान ने अंतराराष्ट्रीय मुद्रा कोष सहित कई देशों से मदद की गुहार लगाना शुरू कर दिया है। सब्जियों में टमाटर के बाद अब आलू भी काफी महंगा हो गया है।  


पाकिस्तान में महंगी हुईं दालें

दिवालिया होने की कगार पर देश

पाक की अर्थव्यवस्था बुरी तरह लड़खड़ा गई है। देश कर्ज के बोझ से दिवालिया होने के कगार पर है। सरकार को अपने पहले साल में 19 अरब का कर्ज चुकाना है। सूद की शक्ल में प्रतिदिन छह अरब रुपये अदा करने पड़ रहे हैं। चालू घाटा बढ़कर नौ अरब रुपये हो गया है।

कर्ज चुकाने के लिए सरकार ने सरकारी संपत्तियों को बेचने का फैसला लिया है। लाख कोशिशों के बावजूद अभी तक वह अपने मित्र देशों से व आईएमएफ, विश्व बैंक से कर्जा लेने में विफल रही है। चीन ने अब पाकिस्तान को दिवालिया होने से बचाने के लिए दो अरब डॉलर कर्ज देने का फैसला लिया है।

कर्जा माफी बना नासूर

2009 से 2015 तक 245 अरब रुपये के कर्ज माफ कराए गए। पिछले 25 साल में 988 से ज्यादा कंपनियों और रसूख वाले लोगों ने चार खरब 30 अरब छह करोड़ रुपये के कर्ज माफ कराए। कर्ज माफ कराने वालों में राजनीतिक व कारोबारी लोग शामिल हैं।
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आलू 60 रुपये, टमाटर 100 रुपये

लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था से जरूरी चीजों की कीमतें बढ़ गई है। इन दिनों टमाटर 100 रुपये और आलू 60 रुपये किलो से भी ज्यादा बिक रहा है। पेट्रोल की कीमतें आसमान छू रही हैं। सच तो यह है कि पाक सरकार अवाम को आर्थिक सुरक्षा प्रदान नहीं कर पाई। आज भी चार करोड़ से अधिक लोग बेरोजगार हैं। इस बेकारी के कारण युवा दहशतगर्दी का दामन थाम रहे हैं।

नवंबर 2013 के बाद मुद्रास्फीति 9.41 पर पहुंच गई है। इसी वर्ष फरवरी में ये आंकड़ा 8.21 पर था। दरअसल, पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाक को मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा छीन लिया और आयात निर्यात होने वाले सामान पर 200 फीसदी ड्यूटी लगा दी। इसके बाद से पाकिस्तान की हालत लगातार खराब हो रही है। केंद्र सरकार की इस कार्रवाई का असर अब परोक्ष तौर पर देखने को मिल रहा है।

पाकिस्तान की विकास दर सार्क देशों में फिसड्डी

यूएन की पिछले हफ्ते ही जारी हुई रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान की इकोनॉमिक ग्रोथ साल 2019 में 4.2 फीसदी और साल 2020 में 4 फीसदी रहने का अनुमान है। वहीं, रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2019 के दौरान बांग्लादेश की आर्थिक ग्रोथ दर 7.3 फीसदी, भारत की 7.5 फीसदी, मालदीव और नेपाल की 6.5 फीसदी रहने का अनुमान है।

पाकिस्तान के सेंट्रल बैंक ने जून में खत्म हो रही 12 महीने की अवधि के दौरान जीडीपी विकास दर 3.5 से 4 फीसदी तक रहने का अनुमान जताया है जो कि सरकार के अनुमान 6.2 फीसदी की तुलना में बहुत कम है।
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