वर्ष 2016 में आज ही के दिन की गई नोटबंदी को ‘आर्थिक नरसंहार’ और ‘आपराधिक कृत्य" बताते विपक्षी दलों ने भाजपा की नेतृत्व वाले केंद्र सरकार की आलोचना की है। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर 2016 को 1,000 रुपये और 500 रुपये के पुराने नोटों को अचानक चलन से बाहर करने की घोषणा कर दी थी। सरकार के इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य देश में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना और काले धन पर अंकुश लगाने के अलावा टेरर फंडिंग को खत्म करना था।
कांग्रेस ने मंगलवार को आरोप लगाया कि नोटबंदी स्वतंत्र भारत की सबसे बड़ी संगठित लूट थी और 2016 के कदम पर मोदी सरकार को एक श्वेत पत्र जारी करना चाहिए। कांग्रेस नेता गौरव वल्लभ ने यहां एआईसीसी मुख्यालय में नोटबंदी की छठी वर्षगांठ पर एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने यह घोषणा कर सभी को चौंका दिया था। अचानक वर्ष 2016 में आज ही दिन 500 और 1,000 रुपये के नोटों को बंद कर दिया गया और इस फैसले को लागू किया गया था। सरकार के इस फैसले के बाद देश के जनता के बीच अफरातफरी का माहौल बन गया, नकदी से जुड़ी बेहिसाब समस्याएं पैदा हुईं और अनगिनत छोटे और मध्यम व्यवसाय बंद हो गए।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत की सबसे बड़ी संगठित लूट के छह साल हो गए हैं। वल्लभ ने सरकार पर नोटबंदी के माध्यम से अर्थव्यवस्था को नष्ट करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आज प्रचलन में नकदी 30.88 लाख करोड़ रुपये है, जबकि नवंबर 2016 में यह महज 17.97 लाख करोड़ रुपये थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नोटबंदी पर सरकार से श्वेत पत्र की मांग करती है।
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के प्रवक्ता और राज्यसभा में पार्टी के नेता डेरेक ओ ब्रायन ने नोटबंदी पर कहा है कि यह कदम एक ‘नौटंकी’ थी। एक ट्वीट में उन्होंने कहा, ‘छह वर्ष पहले आज ही के दिन एक नौटंकी हुई जो एक आर्थिक नरसंहार साबित हुआ। इस बारे में मैंने वर्ष 2017 में आई मेरी किताब इनसाइड पार्लियामेंट में लिखा है।’
येचुरी ने ट्विटर पर लिखा, ‘आज नोटबंदी नहीं मोदी और उनकी सरकार के अहंकार की छठी वर्षगांठ है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था को कमजोर कर रही है। नोटबंदी पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के वरिष्ठ नेता बिनॉय विश्वम ने भी सरकार पर निशाना साधा और कहा कि छह साल पहले उच्च मूल्य के करेंसी नोटों को बंद करने का कदम बड़ी धूमधाम से उठाया गया था और काले धन और आतंकवाद को समाप्त करने का वादा किया गया था। उन्होंने कहा कि अब यह जायजा लेने का समय है कि नोटबंदी ने देश की मदद कैसे की है? वाम नेता ने एक ट्वीट में कहा, ‘अब उन वादों का जायजा लेने का समय आ गया है। पीएम से अनुरोध है कि वे नोटबंदी पर एक श्वेत पत्र पेश करें।’