वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और विशेष रूप से ईरान पर अमेरिकी हमलों के प्रभाव के बीच, बुधवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत उतार-चढ़ाव के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में प्रमुख सूचकांकों ने मामूली गिरावट के साथ लाल निशान में शुरुआत की, क्योंकि निवेशक शांति समझौते की उम्मीदों पर इन हमलों के संभावित असर का आकलन कर रहे हैं। हालांकि, इस दबाव के बावजूद व्यापक बाजारों ने बेंचमार्क इंडेक्स की तुलना में अपना बेहतर प्रदर्शन जारी रखा है।
बुधवार, 27 मई 2026 के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, बाजार में मिला-जुला रुख देखने को मिला:
बाजार में इस सतर्कता का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उभरती अनिश्चितता है। निवेशक ईरान पर अमेरिका द्वारा किए गए हमलों पर करीब से नजर बनाए हुए हैं और यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि इसका अमेरिका-ईरान शांति वार्ता पर क्या असर होगा। यही कारण है कि बुधवार को बाजार लाल निशान में खुले और निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया।
बाजार में इस तेज उतार-चढ़ाव की सबसे बड़ी वजह दुनिया भर में बढ़ रहा भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा लगातार निकाला जा रहा पैसा है। ईरान के दक्षिणी हिस्से में हुए नए अमेरिकी सैन्य हमलों ने मध्य पूर्व में कूटनीतिक शांति की उम्मीदों को काफी कमजोर कर दिया है, जिससे ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने का डर निवेशकों को फिर से सताने लगा है। इसके अलावा, विदेशी निवेशकों ने मंगलवार को ही 2,407 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेच डाले, जिससे बाजार पर बिकवाली का भारी दबाव बन गया। एक्सपर्ट्स का मानना है कि मौजूदा अस्थिर वैश्विक माहौल के कारण उभरते बाजारों में विदेशी निवेशक लगातार जोखिम लेने से बच रहे हैं और बिकवाली का रुख अपना रहे हैं।
इस उठापटक वाले कारोबारी माहौल में कुछ बड़ी कंपनियों के शेयरों को भारी नुकसान उठाना पड़ा, तो वहीं कुछ ने शानदार बढ़त भी बनाई। बाजार को नीचे खींचने वालों में एचडीएफसी बैंक, इंफोसिस, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एक्सिस बैंक, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो) जैसे बड़े नाम सबसे आगे रहे। दूसरी तरफ, इस बिकवाली के दबाव के बावजूद एनटीपीसी (एनटीपीसी), पावर ग्रिड, इटरनल और अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली और ये फायदे में रहे। इन सबके बीच, वैश्विक ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) की कीमत 1.56 प्रतिशत गिरकर 98 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गई है, जो भारत जैसे ऊर्जा आयातक देश के लिए एक राहत की बात हो सकती है।
शेयर बाजार के जानकारों का साफ कहना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक हालात अस्थिर रहेंगे, तब तक बाजार में ऐसा ही डर और उतार-चढ़ाव बना रहेगा। विश्लेषकों के मुताबिक, मध्य पूर्व में चल रहे इस लंबे तनाव और लगातार बदलते घटनाक्रमों के बीच निवेशक बेहद फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। ऐसे में बाजार के बड़े खिलाड़ी और छोटे निवेशक अब मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय शांति वार्ताओं की दिशा और विदेशी निवेशकों के अगले कदम पर ही अपनी नजरें गड़ाए हुए हैं, क्योंकि इन्ही चीजों से तय होगा कि आने वाले दिनों में बाजार फिर से अपनी रफ्तार पकड़ेगा या गिरावट का सिलसिला जारी रहेगा।