सर्वेक्षण के मुताबिक 40.8 फीसदी किसानों ने औपचारिक स्रोतों से जानकारी जुटाई, जैसे कृषि विभाग, बीमा कंपनियां या ग्राहक सेवा केंद्र और शेष को जागरूकता फैलाने वाले खास चैनलों से जानकारी मिली। जिन्हें योजना की जानकारी थी, उनमें से महज 12.9 फीसदी किसान ही अपनी फसल का बीमा करा पाए।
उनमें से भी 77 फीसदी किसान कर्ज से लिंक्ड थे। 41.3 फीसदी किसानों ने जरूरी दस्तावेजों के अभाव को बीमा लेने के लिहाज से एक प्रमुख चुनौती बताया। अन्य चुनौतियों में थे खेत की छोटी जोत (21.4 फीसदी), सरकारी अधिकारी की ओर से सहयोग का अभाव (26 फीसदी) और ऑनलाइन प्रणाली की अक्षमता (17.3 फीसदी)।
दक्ष कर्मियों की है कमी
सर्वेक्षण रिपोर्ट में कहा गया कि जो किसान यहां उल्लिखित कारणों की वजह से अपनी फसल का बीमा नहीं कर पाए, उनमें बीमा हासिल करने की तीव्र ललक है। डब्ल्यूआरएमएस के प्रबंध निदेशक सोनू अग्रवाल ने एक बयान में कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में पीएमएफबीवाई का अच्छी तरह से कार्यान्वयन नहीं हो पाने का एक प्रमुख कारण है दक्ष कर्मियों को अभाव।
कार्यान्वयन के हर चरण में जागरूकता का अभाव है। गैर-कर्जधारक किसानों के बीच जागरूकता बढ़ाने की जरूरत पर बल देते हुए डब्ल्यूआरएमएस ने सुझाव दिया कि सरल प्लेटफॉर्म बनाया जाना चाहिए, ताकि किसानों को योजना में आवेदन करने में, योजना के तहत कवर किए जाने वाले जोखिमों और अपने नुकसान के बारे में सूचना देने के तरीकों के बारे में विवरण हासिल करने में मदद मिल सके।