उद्योग जगत की चिंता और चेतावनी
भारतीय गेमिंग महासंघ (एआईजीएफ), ई-गेमिंग महासंघ (ईजीएफ) और भारतीय फैंटेसी खेल महासंघ (एफआईएफएस) ने इस विधेयक को लेकर चिंता जाहिर की है। संगठनों ने चेतावनी दी है कि इस तरह का पूर्ण प्रतिबंध उद्योग को बर्बाद कर देगा। इससे लोगों की नौकरियां तो जाएंगी ही, इसके अलावा करोड़ों उपोयगकर्ता अवैध विदेशी सट्टेबाजी और जुआ प्लेटफार्मों की ओर धकेले जाएंगे।
इसका उद्यम मूल्यांकन दो लाख करोड़ रुपये से अधिक है और वार्षिक राजस्व 31,000 करोड़ रुपये से अधिक है। यह प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों में सालाना 20,000 करोड़ रुपये से अधिक का योगदान देता है।
भारतीय ऑनलाइन गेमर्स की कुल संख्या 2020 में 36 करोड़ से बढ़कर 2024 में 50 करोड़ से अधिक हो गई है। उद्योग ने जून 2022 तक 25,000 करोड़ रुपये से अधिक का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आकर्षित किया है। उद्योग निकायों ने जोर देकर कहा कि प्रतिबंध से वैश्विक निवेश और निवेशक भावना पर भी प्रभाव पड़ेगा। इसके परिणामस्वरूप 400 से अधिक कंपनियां बंद हो सकती हैं और दो लाख नौकरियां खत्म हो सकती हैं।
भारत के ऑनलाइनगेमिंग हब बनने की संभावना
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस कृष्णन ने कहा कि भारत दुनिया की ऑलाइन गेमिंग का हब बन सकता है। सरकार शुरुआत से ही वैध ई-स्पोर्ट्स और गेम डेवलपर्स को बढ़ावा दे रही है।
सरकार ने ई-स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए
शतरंज समेत अन्य वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त ई-स्पोर्ट्स अब युवा मामले एवं खेल मंत्रालय के दायरे में आते हैं। इसके साथ ही सरकार एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (AVGC) सेक्टर को भी प्रोत्साहित कर रही है। इस क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए मुंबई में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजी की स्थापना की गई है। वहीं, सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (STPI) के तहत विभिन्न सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भी खोले गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस कदम से एक ओर देश में ई-स्पोर्ट्स और क्रिएटिव गेमिंग सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा। वहीं दूसरी ओर अवैध और जोखिमपूर्ण ऑनलाइन मनी-गेमिंग गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सकेगा।