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एथेनॉल वाहनों से भारत को होगी बड़ी बचत: सिर्फ 1% बदलाव से बचेंगे 195 करोड़ रुपये, हरदीप पुरी ने दी जानकारी

Wed, 03 Jun 2026 10:28 PM IST
अमन तिवारी आईएएनएस, नई दिल्ली

सार

एथेनॉल वाहनों की एक प्रतिशत हिस्सेदारी से भारत 195 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचा सकता है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने ई85 ईंधन को सस्ता और सुलभ बनाने की घोषणा की। वहीं, नितिन गडकरी ने एथेनॉल से चलने वाले सस्ते चूल्हे की स्वदेशी तकनीक पेश की है।
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हरदीप सिंह पुरी, केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री - फोटो : ANI
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विस्तार
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केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बुधवार को देश की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण को लेकर एक बड़ी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि अगर भारत में बिकने वाले कुल वाहनों में से केवल एक प्रतिशत वाहन एथेनॉल से चलने लगें, तो देश को बहुत बड़ा आर्थिक फायदा होगा। इससे एक एथेनॉल सप्लाई वर्ष में करीब 195 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचाई जा सकती है।
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नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बाजार में फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों की शुरुआत एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। भारत सरकार का लक्ष्य दूसरे देशों से आने वाले जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना है। एथेनॉल जैसे स्वच्छ ईंधन को अपनाकर देश तेजी से प्रदूषण मुक्त परिवहन की ओर बढ़ सकता है। पुरी ने जोर देकर कहा कि यह कदम न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि देश में बनने वाले जैव ईंधन को भी बढ़ावा देगा।

मंत्री ने घोषणा की कि अब देश में ई85 (E85) ईंधन की उपलब्धता बढ़ाई जाएगी। इस खास ईंधन में 85 प्रतिशत तक एथेनॉल और बाकी पेट्रोल मिलाया जाता है। यह ईंधन देश के चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर मिलेगा। हरदीप पुरी के अनुसार, ई85 ईंधन साधारण पेट्रोल के मुकाबले काफी सस्ता होगा। इससे ग्राहकों के लिए यह एक किफायती और आकर्षक विकल्प बन जाएगा। एथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ने से कच्चे तेल के आयात बिल में कमी आएगी और घरेलू स्तर पर एथेनॉल की मांग भी बढ़ेगी। भारत सरकार की इस रणनीति से न केवल कार्बन उत्सर्जन कम होगा, बल्कि किसानों को भी फायदा मिलेगा। जैव ईंधन की मांग बढ़ने से किसानों के लिए अतिरिक्त कमाई के रास्ते खुलेंगे।
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इसी दिशा में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी एक बड़ी सफलता के बारे में बताया। उन्होंने पिछले महीने स्वदेशी तकनीक से बने एथेनॉल चूल्हे को पेश किया। नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि यह चूल्हा व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर के मुकाबले काफी कम खर्च में खाना पकाने की सुविधा देता है। इस तकनीक में पानी और 7 प्रतिशत एथेनॉल के मिश्रण का उपयोग होता है, जिससे खाना पकाने के लिए पर्याप्त आग पैदा होती है। यह पूरी तरह भारतीय तकनीक है और गैस के मुकाबले काफी सस्ती पड़ती है।
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