ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी) वित्तीय सेवाओं, विनिर्माण, खुदरा ई-कॉमर्स और कृषि समेत चार प्रमुख क्षेत्रों को वृद्धि के लिए एक बड़ा मंच दे रहा है। डेलॉय की रिपोर्ट के मुताबिक, ओएनडीसी वित्तीय संस्थानों को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के साथ जुड़ने का मौका दे रहा है। एमएसएमई कर्ज के लिए मुख्य रूप से सरकारी योजनाओं और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) पर निर्भर है क्योंकि मुख्यधारा के वित्तीय संस्थान उन्हें कर्ज योग्य नहीं मानते हैं।
‘कॉमर्स@भारत’ रिडिफाइनिंग बिजनेस मॉडल एंड सप्लाई चेन’ शीर्षक वाली रिपोर्ट में कहा गया है कि ओएनडीसी वित्तीय प्रौद्योगिकी सेवा प्रदाताओं की मदद से एसएमई पर उपलब्ध डाटा को डिजिटल बना सकता है। इससे वित्तीय संस्थानों के लिए ग्राहकों की बेहतर समझ विकसित कर उत्पाद बनाने में आसानी होगी।
क्या है ओएनडीसी
ओएनडीसी वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की एक पहल है। इसका मकसद खुला एवं अंतर-संचालित नेटवर्क बनाना है, जिस पर खरीदार और विक्रेता एक ही मंच पर उपस्थित होने की जरूरत के बिना लेनदेन कर सकते हैं।
बैंकों के लिए खुलेंगे नए मौके
रिपोर्ट के मुताबिक, छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में ओएनडीसी को अपनाने से बैंकों के लिए नए अवसर खुलेंगे। एमएसएमई पर आरबीआई समिति की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्र में करीब 20-25 लाख करोड़ रुपये का कर्ज संबंधी अंतर है। ओएनडीसी विनिर्माण समुदाय को अवसरों का दोहन करने और मूल्य शृंखला में चुनौतियों के समाधान में सक्षम बना सकता है। खुदरा ई-कॉमर्स क्षेत्र अंतिम उपभोक्ता के साथ जुड़ने के लिए मंच का उपयोग कर सकता है।