बढ़ते मेडिकल खर्चों के बीच स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। बात जब माता-पिता की हो, तो उनके लिए सबसे अच्छी स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी होना कोई विकल्प नहीं, बल्कि एक जरूरत बन जाती है। आज के दौर में एक अच्छी और संपूर्ण स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी होना बेहद जरूरी है। इसलिए, ग्लोबल डे ऑफ पैरेंट्स के मौके पर अपने माता-पिता को जो सबसे अच्छा तोहफा दिया जा सकता है, वो है स्वास्थ्य बीमा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि आपके माता-पिता को सबसे अच्छी मेडिकल देखभाल मिले और आपको अपनी जेब से या उन्हें अपनी रिटायरमेंट बचत को खर्च न करना पड़े।
इसलिए आवश्यक है संपूर्ण स्वास्थ्य बीमा
आप फैमिली फ्लोटर प्लान चुन सकते हैं, जिसमें माता-पिता को आपकी मौजूदा पॉलिसी में शामिल किया जा सकता है या फिर आप उनके लिए अलग से संपूर्ण स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी भी ले सकते हैं। बुजुर्ग माता-पिता को आमतौर पर उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण ज्यादा कवर की जरूरत होती है, इसलिए उनके लिए अलग पॉलिसी लेना बेहतर होता है। एक स्टैंडर्ड पॉलिसी में अस्पताल में भर्ती होने के साथ भर्ती से पहले और बाद के खर्च के साथ डायलिसिस, एंबुलेंस व डोमिसिलिअरी हॉस्पिटलाइजेशन कवर शामिल होता है।
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बड़े काम की चीज है ऐड-ऑन कवर
ऐड-ऑन कवर में सबसे जरूरी है क्रिटिकल इलनेस कवर। यह स्ट्रोक, कैंसर, डायबिटीज, हृदय रोग, न्यूरोलॉजिकल बीमारियां, किडनी फेलियर, ऑर्गन ट्रांसप्लांट जैसी कई गंभीर बीमारियों से सुरक्षा देता है। इसके अलावा, आप कंज्यूमेबल कवर और ओपीडी कवर जैसे ऐड-ऑन भी ले सकते हैं। लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने की स्थिति में ग्लव्स, सीरिंज, पट्टी, कॉटन, मास्क जैसी चीजों पर होने वाला खर्च भी बढ़ सकता है। कंज्यूमेबल कवर होने पर इन खर्चों को जेब से नहीं देना पड़ेगा। ओपीडी कवर से आपके माता-पिता नियमित रूप से डॉक्टर से चेकअप करवा सकते हैं।
खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
कवरेज और पॉलिसी शर्तें: पॉलिसी में क्या-क्या शामिल है और क्या नहीं, यह जानना जरूरी है। इससे क्लेम करते वक्त आप मानसिक रूप से तैयार रहेंगे। को-पेमेंट से लेकर सब-लिमिट तक, पॉलिसी के शब्दों को ध्यान से पढ़ना चाहिए।
नेटवर्क हॉस्पिटल्स: इमरजेंसी कभी भी आ सकती है, इसलिए पॉलिसी में शामिल नेटवर्क हॉस्पिटल्स की सूची जरूर रखें। नेटवर्क हॉस्पिटल में इलाज कराने पर कैशलेस ट्रीटमेंट की सुविधा मिलती है।
को-पेमेंट और वेटिंग अवधि: स्वास्थ्य बीमा में को-पेमेंट का मतलब है कि इलाज का कुछ खर्च बीमाधारक को खुद उठाना होता है, जो 10 से 40 फीसदी तक हो सकता है। कोशिश करें कि ऐसी पॉलिसी चुनें, जिसमें को-पेमेंट शून्य हो, ताकि इलाज के वक्त जेब से ज्यादा खर्च न करना पड़े। इसके अलावा, ऐसी पॉलिसी लें, जिसमें वेटिंग अवधि कम हो।
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बड़ी कारगर है फॉल डिटेक्शन तकनीक
बीमा कंपनियां अब फॉल डिटेक्शन तकनीक के साथ भी आ रही हैं। इसमें माता-पिता को एक स्मार्ट वॉच पहननी होती है, जो गिरने की स्थिति में उसे पहचान लेती है और तुरंत इमरजेंसी कॉन्टैक्ट, सेवाओं व मेडिकल प्रोवाइडर्स को अलर्ट भेज देती है। यह डिवाइस जरूरी संकेतों की निगरानी करती है। इनमें गड़बड़ी पाई जाती है तो तुरंत मेडिकल मदद मिलती है।
-भास्कर नेरुरकर, प्रमुख, हेल्थ एडमिनिस्ट्रेशन टीम, बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस