नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (एनएसई) की 22,569 करोड़ रुपये की आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) गुरुवार को सब्सक्रिप्शन के लिए खुला। पहले दिन इस निर्गम को 43 फीसदी सब्सक्रिप्शन मिला है। यह भारत का दूसरा सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम है, जो 2024 में आए हुंडई मोटर इंडिया के 27,870 करोड़ रुपये के आईपीओ के बाद है।
एक्सचेंजों से मिले आंकड़ों के अनुसार, एनएसई के आईपीओ को पेश किए गए 8.86 करोड़ शेयरों के मुकाबले 3.83 करोड़ शेयरों के लिए बोलियां मिलीं। गैर-संस्थागत निवेशकों की श्रेणी को 72 फीसदी अभिदान प्राप्त हुआ। खुदरा हिस्से को 44 फीसदी अभिदान मिला। योग्य संस्थागत खरीदारों (क्यूआईबी) के कोटे में 19 फीसदी अभिदान दर्ज किया गया।
एनएसई ने बुधवार को एंकर निवेशकों से 6,746 करोड़ रुपये जुटाए थे। इनमें भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी), गोल्डमैन सैक्स और फिडेलिटी शामिल थे। जीआईसी सिंगापुर, अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (एडीआईए) और नॉर्जेस बैंक जैसे सरकारी संपत्ति कोष ने भी भाग लिया। ईस्टस्प्रिंग और एचएसबीसी ग्लोबल एसेट मैनेजमेंट भी इस एंकर दौर में शामिल हुए।
क्या है आईपीओ की संरचना और मूल्य?
यह आईपीओ मौजूदा शेयरधारकों द्वारा 12.64 करोड़ इक्विटी शेयरों तक की बिक्री पेशकश (ओएफएस) है। एक्सचेंज ने आईपीओ के लिए 1,700 रुपये से 1,785 रुपये प्रति इक्विटी शेयर का मूल्य बैंड तय किया है। ऊपरी मूल्य बैंड पर इसका मूल्यांकन 4.42 लाख करोड़ रुपये तक होगा। यह निर्गम 21 सितंबर को बंद होगा।
एनएसई के लिए यह कितना महत्वपूर्ण है?
ओएफएस के आकार में कमी से कुल निर्गम का आकार शुरुआती अनुमानित 30,000 करोड़ रुपये से कम हुआ है। इस पेशकश से प्राप्त राशि मौजूदा शेयरधारकों को मिलेगी, एनएसई को नहीं। यह सार्वजनिक निर्गम एन एस ई के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। नियामक बाधाओं और को-लोकेशन विवाद के कारण इसकी लिस्टिंग योजनाएं लगभग एक दशक से रुकी हुई थीं। एनएसई के 24 सितंबर को बाजार में अपनी शुरुआत करने की उम्मीद है।