नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) की लंबे समय से प्रतीक्षित आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) नियामक समीक्षा हो रही है। बाजार नियामक के प्रमुख तुहिन कांत पांडे ने बताया है कि एक्सचेंज और सेबी के बीच कुछ मुद्दों को सुलझाने के पर चर्चा की जा रही है।
एनएसई आईपीओ मामले में सेबी की चिंताओं में प्रमुख रूप से प्रबंधन कर्मियों को दिया जाने वाला मुआवजा ओर प्रौद्योगिकी और क्लियरिंग कॉरपोरेशन में बहुलांश हिस्सेदारी आदि शामिल हैं। एक्सचेंज ने भारतीय प्रतिभूति व विनिमय बोर्ड (सेबी) से एनओसी के लिए आवेदन कर अपनी लिस्टिंग की प्रक्रिया फिर शुरू कर दी है।
हालांकि एनएसई की ओर से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) दाखिल कर दिया गया है, लेकिन आईपीओ की समय-सीमा अनिश्चित है। दोनों पक्ष प्रमुख मुद्दों को सुलझाने पर काम कर रहे हैं। इनमें कुछ मौलिक प्रकृति के हैं, जिनमें कॉर्पोरेट प्रशासन भी शामिल है।
आईपीओ के लिए संभावित समयसीमा के बारे में पूछे जाने पर पांडे ने पीटीआई से कहा, "मैं इस समय केवल इतना कह सकता हूं कि कुछ मुद्दे हैं...जिन पर एनएसई और सेबी के बीच चर्चा चल रही है। आगे चलकर इसे स्पष्ट करने के इरादे से हम इन मुद्दों को सुलझाने का प्रयास करेंगे।"
एनएसई की आईपीओ योजना पिछले आठ सालों से अटकी हुई है। एक्सचेंज ने सबसे पहले 2016 में अपने ड्राफ्ट पेपर दाखिल किए थे। एनएसई अपने मौजूदा शेयरधारकों की ओर से बिक्री के प्रस्ताव के जरिए 10,000 करोड़ रुपये जुटाना चाहती थी। मौजूदा शेयरधारक अपने 22 प्रतिशत शेयर जनता को बेचना चाहते थे।
हालांकि, गवर्नेंस और को-लोकेशन मामले से जुड़ी नियामक चिंताओं के कारण सेबी ने एनएसई के आईपीओ को मंजूरी नहीं दी। तब से, एनएसई ने मंजूरी के लिए कई बार सेबी से संपर्क किया। मार्च में सेबी ने एनएसई के आईपीओ की जांच के लिए एक आंतरिक समिति के गठन की घोषणा की थी। उस समय, बाजार नियामक ने एनएसई से सभी मुद्दों को सुलझाने को कहा था।
एनएसई का मूल्यांकन करीब 4.7 लाख करोड़ रुपये है। 2024 बरगंडी प्राइवेट हुरुन इंडिया 500 लिस्टेड और अनलिस्टेड कंपनियों की सूची के अनुसार, भारत का सबसे बड़ा इक्विटी एक्सचेंज आईपीओ के पहले ही देश की 10वीं सबसे मूल्यवान निजी कंपनी है।